हिन्दुओंके लिए लज्जाजनक, यमुना जलसे ठाकुर जीका स्नान बंद, ‘आरओ’के जलसे नहलाया जा रहा !!


जून १७, २०१९

यमुना जलका प्रदूषण कहीं भगवानके स्वास्थ्यपर प्रभाव न डाल दे; इसलिए ठाकुर बांके बिहारी और द्वारिकाधीशको भी ट्यूबवेल और ‘आरओ’के जलसे नहलाया जा रहा है । इतना ही नहीं श्रीकृष्ण जन्मस्थान सहित अन्य प्राचीन मंदिरोंमें ठाकुरजीके विग्रहोंको स्नान करानेके लिए सबमर्सिबलके जलका प्रयोग किया जा रहा है । उल्लेखनीय है कि ब्रजके प्रसिद्ध मंदिरोंमें यमुना जलसे ठाकुरजीका नित्य जलाभिषेक करानेकी परम्परा रही है । कुछ वर्ष पूर्व कई मंदिरोंने यमुना जलका प्रयोग बंद कर दिया था ।

वर्षाके पश्चात जल स्वच्छ होनेपर यमुना जलका उपयोग होता था; परन्तु कई मंदिरोंमें इस ऋतुसे इस व्यवस्थाको भी पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है । ठाकुर बांके बिहारी मंदिरमें भी यमुना जलका उपयोग पूर्णत: रोक दिया गया गया है । धीरे-धीरे यमुनामें प्रदूषण बढने लगा तो इस आशंकामें कि कहीं ठाकुरजीकी प्रतिमाको संकट न हो, मंदिरोंमें यमुना जल मंगाना बंद कर दिया ।

एक दशक पूर्वतक ब्रजमें आनेवाले श्रद्धालु पहले यमुना जलमें डुबकी लगाकर यात्राको सफल मानते थे; परन्तु प्रदूषणने इस धार्मिक मान्यताके अर्थ ही परिवर्तित कर दिए । अब तो लोग आचमनसे भी कतराते हैं !!

एक दशक पहलेतक तो मथुरासे यमुना जल राजस्थानके प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर भी ले जाया जाता था; परन्तु अब यह परंपरा बंद हो चुकी है । ब्रिटिश शासनमें बसमें केबिनमें पीतलका कलश लेकर आते थे और यमुना जल लेकर जाते थे ।

यमुनाजीके प्रति वैष्णव भक्तोंमें गहरी आस्था है । गुजरात और काठियावाडसे आनेवाले भक्त आज भी लोटियोंमें यमुना जल लेकर जाते थे; परन्तु यह संख्या अब अल्प हो गई है । यापारी ने बताया कि अब प्रदूषणके कारण २०% भक्त ही जल यहांसे ले जाते हैं ।

बांके बिहारी मंदिरमें रोज एक भंडारीका कार्य यमुना जल लाने की है । प्रदूषणके कारण पहले इसे ‘आरओ’में शुद्धिकरण किया जाता है । इसके पश्चात ठाकुर जीका अभिषेक किया जाता है ।

“यमुनाजीकी इस दुर्दशाके लिए हम तथाकथित धार्मिक लोग ही उत्तरदायी है । आज देखा गया है कि ईश्वरकी सत्तामें विश्वास न रखनेवाले देश अपनी नदियोंको स्वच्छ रखते हैं और हम तथाकथित धार्मिक लोग नदियोंको मां मानते हैं और उन्हीं नदियोंको गन्दा करते हैं । क्या यही है धर्म ? यह हम धार्मिकोंकी उच्छृंखलता और अनुशासनहीनताको दिखाता है । अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके साथ ही नदियोंकी स्वच्छता सम्भव है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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