जून १६, २०१९
आन्ध्रप्रदेशके अनंतपुरमूमें अपने विद्यालयमें १४ वर्षकी एक युवतीसे छेडछाडके आरोपमें शनिवार, १५ जूनको एक पादरीको बन्दी बनाया गया । पुलिसके अनुसार, जिस घटनाके सम्बन्धमें पादरीको बन्दी बनाया गया है, वह नवम्बर माहकी है । बन्दी बनानेके पश्चात पादरीके विरुद्ध ‘पॉक्सो अधिनियम’ सहित अन्य धाराओंमें अभियोग प्रविष्ट किया गया है ।
शनिवारको आंध्र प्रदेशके डीजीपी कार्यालयसे जारी विज्ञप्तिके अनुसार आरोपी पादरीके विरुद्घ इस सम्बन्धमें भारतीय दण्ड संहिता, यौन अपराधोंसे बच्चोंकी सुरक्षा (पॉक्सो) विधान, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) विधानकी सम्बन्धित धाराओंके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।
विज्ञप्तिके अनुसार आरोपी पादरीको २८ जूनतक कारावासमें भेज दिया गया है तथा वह अनन्तपुरमू कारावासमें बंद है । पुलिसने बताया कि पादरी एमिली राज तडीपत्रीमें एक गिरजाघरके साथ एक विद्यालयका संचालन करता है । यहींपर हुई कथित घटनाके पश्चात मिली परिवादके आधारपर उसे बन्दी बनाया गया है ।
“कुछ समय पश्चात इन्हीं पादरीको केरल गिरिजाघरके बिशपकी भांति छोड दिया जाएगा और वहीं हिन्दू वृद्ध सन्तोंको वर्षोंतक कारावासमें रखा जाता है । यह इस हिन्दू बहुल देशकी विडम्बना ही है और जब पादरी और मौलवियोंने दुष्कर्म ही करना है तो इन्हें इस देशमें रखा ही क्यों गया है ? आए दिन आनेवालै समाचार तथाकथित इस्लामिक व ईसाई धर्मगुरुओंकी धार्मिक सत्यता भी उजागर करते हैं । अब समय आ गया है कि भारत इस तथाकथित धर्मनिरपेक्षताके कोढसे मुक्त होकर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हो । “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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