मार्च ६, २०१९
आतंकवादी अफजल गुरुके पुत्रको ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ने ‘प्राउड इंडियन’ बताते हुए एक समाचार प्रकाशित किया था; परन्तु वो कहींसे भी भारतपर गर्व करने योग्य नहीं है, यह बात उसने स्वयं स्वीकारी है । ५ मार्च २०१९ की सन्ध्याको अफजलके पुत्र गालिब गुरुने इस रिपोर्टपर आश्चर्य प्रकट किया । उसने कहा कि ब्यौरेको न केवल अनुचित ढंगसे प्रस्तुत किया गया, वरन उसमें ‘विचित्र बातें’ भी लिखीं गई हैं ।
ऊपरके वीडियोमें गालिबने कहा, “ये इनकी समस्या थी कि मेरे पारपत्रके (पासपोर्टके) बारेमें उन्होंने बोला था कि बाइट निकालेंगे; परन्तु जब उनका लेख पढा था तो उसमें विचित्र चीजें थीं । मेरी समस्या एक ही थी कि यदि मेरे पास आधार कार्ड है तो मैं पारपत्र क्यों नहीं ले सकता हूं ? उनको मैंने इसलिए बोला था कि इस वर्ष मेरा ‘एनइइटी’का दूसरा अवसर है, यदि नहीं होता तो टर्की मुझे छात्रवृत्ति देती है; इसलिए मैंने उनको बोला था कि मेरा पारपत्र (पासपोर्ट) होना चाहिए; परन्तु उन्होंने एकदम भिन्न लिखा है इसके बारे में । लिखा है कि मैं ‘इंडियन सिटिजन प्राउड’ हूं । एक चीज मैं बोलना चाहता हूँ कि ‘हाउ केन आई बी प्राउड इंडियन सिटिजन’ ? (मैं एक भारतीय नागरिक होनेपर गर्व कैसे कर सकता हूं ?) उन्होंने मेरे पापाको मारा है । उन्होंने मेरे पूरे परिवारके साथ अन्याय किया है, तो मैं भारतपर गर्व कैसे कर सकता हूं ?”
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’की ओरसे पत्रकार आरती सिंह टीकू और रोहन दुआने ५ मार्चको प्रकाशित ब्यौरेमें गालिबको ऐसे प्रस्तुत किया गया है, जिसे अपने आधार कार्डपर गर्व है और वो अब पारपत्र (पासपोर्ट) बनवाना चाहता है, जो उसकी भारतीय पहचानको और सशक्त बनाएगा । इसको जब गालिबने पढा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ और इसीके विरोधमें उसने ऊपरके वीडियोमें अपने ‘हृदयकी बात’ कही ।
“प्रतीत होता है कि आतंकी अफजलके पुत्रसे अधिक पत्रकारोंको चिन्ता है कि किसप्रकार उसे ‘प्राउड इंडियन’ दिखाया जाए ! ऐसी पत्रकारिता देशके लिए हानिकारक हो सकती है ! आतंकीका पुत्र कह रहा है कि मैं कैसे राष्ट्रपर गर्वित हो सकता हूं; क्योंकि मेरे परिवार और कश्मीरके साथ अन्याय हुआ है ! क्या ऐसे लोग राष्ट्रके लिए घातक सिद्ध नहीं होंगें ? क्या इनकी निष्ठा राष्ट्रके प्रति कभी हो पाएगी ? स्वयं विचार करें !”- वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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