जुलाई १६, २०१८
‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’द्वारा किए जाने वाले निर्णय बीजेपी और आरएसएसके लिए उर्वरका कार्य करते हैं, फिर प्रकरण ‘तीन तलाक’का हो, ‘बाबरी मस्जिद’का अथवा ‘शरिया न्यायालय’ (दारुल कजा) बनाए जानेका हो । इनके निर्णयसे मुसलमानोंको अल्प, संघ और बीजेपीको कुछ अधिक ही लाभ मिलता दिख रहा है । ऐसे में मुस्लिम संगठन ही ‘एआईएमपीएलबी’के विरुद्ध हैं ।
‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’के विरुद्ध ‘शिया वक्फ बोर्ड’ पहले से अभियान चला रहा है । इसके पश्चात अब सुन्नी समुदायका बरेलवी फिरका भी प्रसन्न नहीं दिख रहा है । २०१९ लोकसभा मतदानसे पूर्व ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’द्वारा ‘शरिया न्यायालय’ बनाए जानेसे क्रोधित हैं ।
मौलाना तौकीर रजाने आजतकसे कहा, “‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ बीजेपी और आरएसएसकी गोदमें बैठ गया है और उसीके संकेतपर खेल रहा है । लोकसभा मतदानसे पूर्व हिन्दू-मुस्लिमको आमने-सामने लानेका कार्य हो रहा है । बीजेपीको लाभ पहुंचानेके लिए यह प्रकरण उठाया गया है । ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ पूर्व निर्धारित चुनावी वर्षमें शरई न्यायालयकी बात कर रहा है, जबकि धार्मिक निर्णयके लिए ‘दारुल इफ्ता’ पहले से हैं, जहां शरई निर्णत्र होते हैं । इसके पश्चात भी समितिके द्वारा यह सब कहना स्पष्ट दिखाता है कि संघके संकेतपर सब कुछ हो रहा है ।”
‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ भी ‘कहीं न कहीं’ यह स्वीकार करता है कि उनके निर्णयपर संघ और बीजेपी राजनीति करते हैं । जफरयाब जिलानी कहते हैं कि आरएसएस और बीजपी शरई न्यायालयके नामपर राजनीति कर रहे हैं ।
बोर्डके विरोधमें ही मौलाना तौकीर रजाने ‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जदीद’के नामसे अलग संगठन पहले बना रखा है । वहीं शिया समुदाय भी ‘अरपा शिया पर्सनल लॉ बोर्ड’ चला रहा है । इससे स्पष्ट है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’पर सभी एकमत नहीं हैं ।
स्रोत : आजतक
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