जून ३, २०१९
कश्मीरके आदिल अहमदने ऑस्ट्रेलियाके क्वीन्सलैंडसे एमबीए किया और उसके पश्चात आइएसमें चला गया !! २०१३ में सीरिया जाकर आतंकी बननेवाले आदिलने घरपर बताया था कि वह सीरिया एक संगठनके साथ काम करने जा रहा है और अब जबकि ‘आइएस’को अमेरिकी-गठबंधनके देशोंने पराजित कर दिया है और आदिल कारावासमें है, तो उसके पिता उसे बचानेके प्रयासमें जुटे हैं । उन्होंनें इसकी एक याचिका राज्य पुलिसने केन्द्र शासनको अग्रेषित की है ।
आदिलके पिता फयाज अहमद किराना स्टोर चलानेके साथ-साथ ठेकेदारका काम करते हैं । उनके अनुसार उनके लिए अभी भी यह विश्वास करना कठिन है कि उनका पुत्र ऐसे आतंकी संगठनमें जा सकता है । ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’से बात करते हुए वह बताते हैं कि उन्हें केन्द्र शासनसे आशा है कि उनके पुत्रकी घर-वापसीको गति मिलेगी ।
शिक्षा पूर्ण करनेके पूर्व ही आतंकी समूहोंके सम्पर्कमें आनेके पश्चात आदिल एमबीए समाप्तकर जॉर्डनसे होता हुआ २१ जून, २०१३ को तुर्की जा पहुंचा । वहां एनजीओमें काम करनेके बहाने पहुंचनेके पश्चात उसने एक डच (हॉलैंड निवासी) महिलासे निकाह भी कर लिया, और उसे भी जिहादमें सम्मिलित कर लिया । २०१४ में उसकी पत्नीने एक पुत्रको जन्म दिया, जो अधिक दिन जीवित न रहा ।
आदिल और उसके कुछ सौ मित्रोंने जब आइएस छोडकर शस्त्र डाले तो उन्हें कारावास भेज दिया गया । वहांसे उसकी डच पत्नीने ‘इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसाइटी’की सहायतासे अपने ससुराल वालोंसे हिंदुस्तानमें सम्पर्क किया और सहायता मांगी । आदिल कश्मीरसे आइएसमें जानेवाला प्रथम आतंकी है । फयाज अहमद बताते हैं कि जब उन्होंने अधिकारियोंसे सहायता मंगी तो उन्हें ज्ञात हुआ कि नूतन केन्द्र शासन बननेके पश्चात ही प्रकरणपर विचार होगा ।
‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ बताता है कि आदिलकी वापसीमें सुरक्षा विभाग भी रुचि दिखा रहा हैं । नाम न प्रकाशित करनेके अनुबन्धपर (शर्तपर) एक अधिकारीने बताया है कि यदि आदिलको वापिस ले आया जाए तो आइएसके काम करनेके ढंग, उनके भविष्यकी योजना सहित कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं ।
“यदि भारत शासन आतंकी आदिलको भारत वापस लाता भी है तो उसे मुक्त करना एक संकट मोल लेना ही होगा; क्योंकि वह मानसिकता, जो उसे जिहादकी ओर बढाती है, जिसने उसे शिक्षा छोडकर जिहादकी राहपर भेजा है, वह अभी समाप्त नहीं हुई है । केन्द्र शासन इसपर अवश्य विचार करें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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