ओडिशाके ‘टाइगर रिजर्व’में आग पशु तस्करोंका षड्यन्त्र या प्रकृतिका कोहराम ?
०७ मार्च, २०२१
स्थानीय अधिकारियोंने बताया कि जंगलसे लगे सीमावर्ती क्षेत्रोंमें ३९९ ‘फायर पॉइंट्स’ चिह्नित किए गए हैं । उनका कहना है कि ये ‘पॉइंट्स’ गांवोंके निकट हैं और आगको नियन्त्रित करनेके लिए प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्थिति नियन्त्रणमें है ।
ओडिशाके सिमिलिपाल अभयारण्यमें लगी आगने पर्यावरणविदोंकी चिन्ताएं बढा दी हैं । सिमिलिपाल बाघोंके लिए भी लोकप्रिय है; परन्तु इसमें प्रायः लगनेवाली आगने जंगलके अस्तित्वपर प्रश्न खडे कर दिए हैं । फरवरीमें इसके ‘बायोस्फेयर रिजर्व एरिया’में आग लग गई और एक सप्ताहतक जंगल जलता रहा । यद्यपि, अब इसे नियन्त्रित कर लिए जानेकी बात कही जा रही है । ये उत्तरी ओडिशाके मयूरभंज जनपदमें स्थित है ।
सिमिलिपालका नाम ‘सिमुल’से आया है, जिसका अर्थ है सिल्क ‘कॉटन’के वृक्ष । ये एक राष्ट्रीय अभयारण्य और ‘टाइगर रिजर्व’ है ।
‘टाइगर रिजर्व’में आग लगना एक सुनियोजित षड्यन्त्र प्रतीत होता है । कुछ राजनीतिक दल और अन्य लोग सीधे आरोप लगा रहे । यदि उन्हें सच माना जाए तो यह बीजद शासनकी घोर विफलता है । आग लगानेमें पशु तस्कर ‘शिकारियों’ और लकडी ‘माफिया’ और स्थानीय लोग मदिराके लिए महुआके फूल लेने जाते हैं, उनका हाथ बताया जाता है । यदि ‘टाइगर रिजर्व’में आग प्राकृतिक रूपसे लगी है, तब भी शासनका उत्तरदायित्व है कि अभयारण्यको बचाने और ऋतुओंके सन्तुलनको बनाए रखनेके लिए अभयारण्यको आगसे बचानेके लिए ग्रीष्मऋतु आनेसे पहले समुचित व्यवस्था करे, जिससे अभयारण्यको बचाया जा सके और निरीह पशुओंके प्राणोंकी रक्षा हो सके । आशा है मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक अपनी छविके अनुसार कठोर कार्यवाही करेंगे और दोषियोंको दण्डित भी करेंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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