केरलमें १५ वर्षीय बालिकासे यौन उत्पीडनके आरोपमें इमाम शफीक बन्दी बनाया !!


मार्च ८, २०१९


केरलमें १२ फरवरीको एक मौलवीपर १५ वर्षकी एक युवतीका उत्पीडन करनेके आरोपमें प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । पुलिसने यह जानकारी देते हुए बताया कि वीथुराके थलीकोडकी एक ग्रामीण मस्जिदमें सेवा दे रहे मौलवी शफीक अल कासिमीको इस घटनाके प्रकाशमें आनेके पश्चात्त पदसे हटा दिया गया था ।

मस्जिद समितिकी ओरसे प्रविष्ट परिवादके आधारपर मौलवीके विरुद्घ ‘पोक्सो अधिनियम’के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । वक्तव्यके अनुसार वह १५ वर्षीय युवतीको इस क्षेत्रमें एक वीरान स्थानपर ले गया और उसका यौन उत्पीडन किया । यह घटना उस समय प्रकाशमें आई, जब स्थानीय महिलाओंके एक दलने मौलवीको युवतीके साथ जंगलमें देखा और पूछताछ की ।

आरोपीका अभिज्ञान शफीक अल कासिमीके रूपमें हुआ था, जो थोलिकोड मस्जिदका मुख्य इमाम था और साथ ही ‘केरल इमाम काउंसिल’का सदस्य भी था ।

मस्जिदके अध्यक्ष बदुशाद्वारा साक्ष्योंके वक्तव्यका एक ध्वनि सन्देश जारी किया गया था । मस्जिदके सदस्योंद्वारा जांच आरम्भ करनेके पश्चात इस समूचे प्रकरणका प्रकटीकरण हो गया है । विवरणके अनुसार, जब स्थानीय महिलाओंने इमामसे प्रश्न किया, तो उसने असत्य बोला कि बच्ची उसकी पत्नी थी । जब महिलाओंने बच्चीकी वेशभूषापर ध्यान दिया, तो उन्हें संदेह हुआ ।

जब महिलाओंने प्रश्न किया कि १५ वर्षकी युवती ४० वर्षीय व्यक्तिकी पत्नी कैसे हो सकती है, तब इमाम आपा खोने लगा और स्वयं ही चिल्लाता हुआ वहांसे भाग निकला !

 

“महिलाएं अवश्य ही हिन्दू रही होंगी, जो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि १५ वर्षीय बालिका एक वृद्ध धर्मान्धकी पत्नी कैसे हो सकती है और बच्ची बच गई ?, अन्यथा इस्लाम तो इसकी आज्ञा देता है !! बच्चीके साथ इमामका दुष्कर्म भी इस्लामिक आज्ञानुसार ही है; परन्तु यह सब हिन्दुस्तानकी भूमिपर हो रहा है ! आज न केवल युवतियां, वरन बालिकाएं भी धर्मान्धोंसे सुरक्षित नहीं है और यह अवस्था तब है थब धर्मान्ध अभी २० – २५% के लगभग है और अधिट बढनेकी छूट दी गई तो इस राष्ट्रका अस्तित्व ही संकटमें आ जाएगा ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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