जून १२, २०१९
केरलके वामपन्थी शासनकी कथित सहायतासे ईसाई गिरिजाघरपर अब सबरीमाला मन्दिरसे जुडे ‘पवित्र वनों’का अतिक्रमण करनेका आरोप लगा है । समाचार विभाग ‘ऑर्गनाइजर’के अनुसार, केरलमें इस स्थानको ‘पूनकवनम’ कहा जाता है ।
‘ऑर्गनाइजर’के अनुसार, मलयालम समाचारपत्र ‘जन्मभूमि’का एक समाचार बताता है कि इडुक्की जनपदके सबरीमाला जंगलोंके एक भाग पांचालिमेडुके पास वनभूमिका बृहद स्तरपर अतिक्रमण हुआ है ! ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’के अन्तर्गत इस समूचे क्षेत्रको ऐसा माना गया था, जिसे पारिस्थितिक रूपसे संरक्षणकी आवश्यकता है ।
पांचालिमेडु, स्थानीय हिन्दुओंके लिए एक पवित्र स्थान है, जिसका नाम पांचाली/ द्रौपदीके नामपर रखा गया है । ऐसा माना जाता है कि १२ वर्षके वनवासके समय वो पांडवोंका निवास स्थान था । त्रावणकोर देवास्वोम बोर्डके अन्तर्गत एक प्राचीन भुवनेश्वरी मन्दिर भी अतिक्रमित भूमिके पास स्थित है । ऐसा माना जाता है कि गिरिजाघर कथित रूपसे राज्यके समर्थनसे अवैध अधिकार करके शासन और वनभूमिको अधिकृत करनेकी अपनी सामान्य रणनीतिकी पुनरावृत्ति (दोहराना) कर रहा है ।
चिंताजनक प्रकरण यह है कि गिरिजाघरने पहले से ही एक समिति स्थापित कर रखी है और वन क्षेत्रमें एक आर्कियन भी है, जो यह दावा करता है कि यह स्थान ईसाई तीर्थस्थल है !! ब्यौरोंसे ज्ञात हुआ है कि इसका केन्द्र बिन्दू सबरीमाला मन्दिर है, जो गत सात वर्षोंसे ‘धर्मांतरण लॉबी’की दृष्टिपर है ।
चार दशक पूर्व, ईसाई संगठनोंने नीलक्कलमें सबरीमाला भूमिको हडपनेका प्रयास किया था, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने ५७ ए.डी. में यीशुके प्रचारक सन्त थॉमसद्वारा स्थापित एक पत्थरका पता लगाया था । पुजारीने (ईसाई) स्थलपर एक ईसाई गिरिजाघर बनानेका प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए अपने दावेपर बल दिया । इसपर हिन्दुओंके कडे विरोधके पश्चात भी, शासनने कैथोलिक गिरिजाघरको लगभग ५ एकड भूमि निशुल्क सौंप दी !!
केरलके वामपन्थी शासनने इसपर अनिश्चित रूपसे अबतक मौन साध रखा है, जबकि सबरीमालाके विरोधके समय यह बात स्पष्ट हो गई थी कि यह प्रकरण हिन्दुओंसे जुडा हुआ है । कथित रूपसे, मुन्नारमें Pappathichola से इसीप्रकारके अतिक्रमणकी सूचना मिली है; परन्तु राजस्व अधिकारियोंने इसे हटा दिया । इतना होनेके पश्चात भी, राज्य शासनने एक बार पुनः अपने पग आगे बढाए और मुख्यमन्त्री विजयन व अन्य सीपीएम नेताओंके हस्तक्षेपके पश्चात वहां ‘क्रॉस’को पुनः स्थापित कर दिया गया ।
“अब वामपन्थियों, ईसाईयों, तथाकथित महिला अधिकारकी बात करनेवाली समाज सेविकाओंका ढोंग उजागर हो गया है कि कैसे ये हिन्दू धर्मस्थलको नष्टकर उसे एक ईसाई स्थान बनाना चाहते हैं और सब मिशनरियोंके संकेतोंपर ही कार्य कर रहे हैं । क्या यह बात हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनोंको भी नहीं ज्ञात हुई ? और यदि हुई तो इसे उजागर क्यों नहीं किया ? यह भी संदेहास्पद है । हिन्दुओ ! अपने अस्तित्व और धरोहरकी रक्षा चाहते हैं तो स्वयं खडे हो जाए । आप स्वयं ही धर्मरक्षण हेतु तत्पर हों और ईसाई मिशनरियोंको अपने-२ क्षेत्रसे बाहर फेंकें । “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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