जून ४, २०१९
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सहित उनके कहनेपर मन्त्री और देशकी बडी-बडी प्रतिभाओंने अतिवैशिष्ट्य संस्कृति (VVIP कल्चर) भले छोड दिया हो या छोड रहे हों; परन्तु कारावासमें बन्द माफियाओंको अब भी अतिवैशिष्ट्य संस्कृतिकी लत पडी हुई है । इसका एक अचम्भित करनेवाला प्रकरण सोमवार, ३ जूनको उस समय सामने आया, जब माफियासे नेता बने अतीक अहमदको उत्तर प्रदेशके प्रयागराजकी कारावाससे गुजरातके अहमदाबादके कारावासमें ले जाया गया ।
अतीक अहमदको स्थानांतरित करनेको लेकर प्रातःकालसे ही उसके आवभगत और उसे मिलनेवाली विशेष सुविधाओंके समाचार सामने आ रहे हैं । पहले उसे प्रयागराजकी नैनी कारावाससे कुर्ता-पजामामें विमानसे अहमदाबादके साबरमती कारावास ले जाया गया । इस मध्य उसके साथ कई पुलिसवाले थे; परन्तु उन्हें देख अनुमान लगा पाना कठिन था कि वह अतीकको पकडकर ले जा रहे या उसे किसी सुरक्षामें ले जा रहे हैं ।
इस मध्य अतीकके श्वेत कुर्तेकी ऊपरवाली जेबमें २००० रुपयेके नोटोंकी गड्डी स्पष्ट दिख रही थी । विमानसे अहमदाबादके कारावास पहुंचते ही अतीक अहमदने वहां भी ‘वीवीआईपी ट्रीटमेंट’की मांग कर दी । कारावासमें ‘वीवीआईपी ट्रीटमेंट’ पानेके लिए कुछ तो आधार चाहिए ही, उसने इसके लिए अपने रुग्ण होनेका बहाना बनाया । उधर उसके विमानतलपर पहुंचनेसे पूर्व अतिरिक्त गृह सचिव एमए तिवारी साबरमती कारावासका भ्रमण कर चुके थे ।
अहमदाबादके ‘सरदार पटेल विमानतरपर (एयरपोर्टपर)’ ‘स्पाइसजेट’के विमान ‘एसजी-९७२’से सोमवार प्रातःकाल भारी पुलिस बलके साथ पहुंचे माफिया अतीक अहमदने बाहर आते ही किसी अभिनेताकी भांति लोगोंका हाथ हिलाकर अभिवादन किया । पुलिस मौन रहकर सब देख रही थी ।
उत्तर प्रदेशसे गुजरात कारावासमें स्थानान्तरित करनेके मध्य उसके किसी साथीने भारी पुलिस बलकी उपस्थितिमें अतीकको पुष्पोंका हार पहना दिया, जिसे पुलिस वैनमें बिठानेसे पूर्व पुलिसने उतार दिया । इसके अतिरिक्त अतीकके कुर्तेकी जेबमें दो-दो सहस्रके नोटकी गड्डी भी दिख रही थी । इसे लेकर लोगोंके मध्य कई प्रकारकी चर्चाएं भी चल रही हैं । उल्लेखनीय है कि अतीक अहमदके कहनेपर उसके गुण्डोंने फिरौतीके लिए एक व्यापारीका अपहरण कर लिया था, जिसके पश्चात उच्चतम न्यायालयने उसे दूसरे कारावासमें स्थाननांतरित करनेको कहा था ।
साबरमतीके जेलर एमके नायकने बताया कि अतीकको सामान्य बन्दीकी भांति ही रखा जाएगा, यहां उसे कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी । सुरक्षा कारणोंसे कारावास अधिकारी, यह जानकारी नहीं दे रहे हैं कि अतीकको किस कारावासमें रखा जाएगा । अतीकने स्वयंके रुग्ण होनेको लेकर कारावास प्रशासनसे कुछ सुविधाएं मांगी है; परन्तु कारानवास प्रशासनका कहना है कि नियमोंके अनुसार ही उसे चिकित्सिय सुविधा मिलेगी ।
माफिया अतीक अहमदको कारावासमें रखकर भी शासन उसपर इतना धन व्यय कर रही है, जितना किसी विशेष व्यक्तिपर होता है । शासन प्रत्येक माह अतीकपर लगभग एक लाख रुपए व्यय करेगी, जो उसके खाने-पीने व अन्य व्यवस्थाको लेकर है ।
अतीकको गुजरात भेजे जानेके साथ अतीक युगकी समाप्तिके भी संकेत मिलने लगे हैं । लोकसभा चुनावसे ठीक पहले अतीक अहमदको नैनी सेंट्रल कारावास भेजा गया था, गत २३ अप्रैलको उच्चतम न्यायालयने कारावासमें पिटाईकी घटना और अतीकके अपराधिक इतिहासको देखते हुए गुजरातके किसी कारावासमें भेजनेका आदेश दिया था । अतीक अहमदपर बसपाके विधायक रहे राजू पालकी हत्याका आरोप है । प्रयागराजके कई थानोंमें अतीक अहमदपर हत्या, अपहरण, रंगदारी बहात कई दशकाधिक गम्भीर प्रकरण प्रविष्ट हैं ।
“इसलिए ही भारत सर्वसम्पन्न होते हुए भी निर्धन, बलहीन हो चुका है । यदि गुण्डे इसप्रकार सुविधाएं पाते हैं तो उस देशमें नियम और विधानको कौन मानेगा ? इससे स्पष्ट होता है कि वर्तमान व्यवस्था न ही हमें न्याय दे सकती है न ही सुरक्षा और इस व्यवस्था परिवर्तन हेतु अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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