अगस्त ८, २०१८
छत्तीसगढमें विधानसभा मतदानकी तैयारियोंको देखनेके लिए पांच सितारा विश्रामालयमें (विश्रामालयमें) चुनाव आयोगकी बैठक किसीके ‘गले नहीं उतर रही’ है । लोगोंको आशा थी कि अपव्यय रोकने का परामर्श देने वाला चुनाव आयोग जब छत्तीसगढमें बैठक करेगा तो इसके लिए शासकीय भवनका प्रयोग करेगा; लेकिन स्वयंके बैठकके लिए उसने पांच सितारा विश्रामालय चुन लिया ।
वो भी तब जब रायपुरमें वातानुकूलित और भव्य शासकीय भवन और सभामण्डप (ऑडिटोरियम) रिक्त पडे हैं ! पांच सितारा विश्रामालय में चुनाव आयोग की यह बैठक राज्यभर में चर्चा का विषय बनी हुई है ।
रायपुरके एक पांच सितारा विश्रामालयमें आयोजित चुनाव आयोगकी यह वो बैठक है, जहां आयोगके अधिकारी मतदान चर्चा कर रहे हैं । राज्यके २७ प्रान्तोंके जिलाधिश, एसपी, आईजी और प्रमुख रिटरिंग अधिकारी इस बैठकमें उपस्थित रहे । इस पांच सितारा विश्रामालयमें अधिकारियोंके खाने-पीने से लेकर कुछ समय व्यतीत करनेकी पूरी व्यवस्था की गई है । अधिकारियोंके भोजनके लिए विशेष व्यंजन भी तैयार किए गए है । ताकि विभिन्न प्रान्तोंसे बुलाए गए निर्वाचन अधिकारियोंकी अच्छी प्रकारसे आवभगत हो सके ।
इसके लिए व्ययकी कोई सीमा निर्धारित नहीं है और न ही इस ओर ध्यान दिया गया है । चुनाव आयोगके अधिकारी अच्छा अनुभव कर सकें, इसके लिए पांच सितारा विश्रामालयसे अच्छा और कौन सा स्थान हो सकता है ! ऐसा नहीं है कि रायपुरमें पांच सितारा विश्रामालयोंके समकक्ष और कोई दूसरे शासकीय भवन नहीं है । यहां भव्य वातानुकूलित कक्ष और सुविधाओं वाले भवन और सभामण्डप रिक्त पडे हैं; लेकिन चुनाव आयोगको पांच सिताया विश्रामालय ही रास आया !
चुनाव कार्यसे सम्बन्धित अधिकारियोंकी बैठकें यहीं निपटाई गई; लेकिन यहां कुछ और भी लोग पहुंचे थे, जिन्हें चुनाव आयोगका अपव्यय रास नहीं आया ।
स्थानीय नागरिक गौरव शर्माके अनुसार रायपुरमें भव्य शासकीय भवन हैं । वातानुकूलित भवन स्वयं शासन उपलब्ध कराता है । चुनाव कार्यके लिए ये भवन निशुल्क उपलब्ध होतीं; लेकिन शासकीय कोषका धन दुरुपयोग करनेकी लत स्वयं अधिकारियोंकी है ।
स्थानीय नागरिक संजय पांडेके अनुसार चुनाव आयोगको जनताके धनका ध्यान रखना चाहिए । उनके अनुसार पांच सितारा विश्रामालयमें किसी राजनीतिक दलका जलसा समझमें आता है; लेकिन चुनाव आयोगका नहीं !
उधर, दिल्लीसे आए वरिष्ठ चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हासे जब पत्रकारोंने विश्रामालयमें बैठक करनेका उद्देश्य पूछा तो वे ‘बगलें झांकने’ लगे ! उन्होंने इसे राज्य शासनकी व्यवस्था बताकर अपना ‘पल्ला झाड’ लिया, यद्यपि उन्होंने माना कि विश्रामालयके स्थानपर यह बैठक कहीं और भी हो सकती थी ।
चुनाव आयोग राजनीतिक दलोंको अनावश्यक चुनावी अपव्ययपर रोक लगाने और निर्धारित धनके भीतर ही चुनावी व्यय निपटानेका परामर्श देता है । धनके अपव्ययपर दृष्टि रखनेके लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त करता है; लेकिन जब स्वयंकी बारी आती है, तो शासकीय भवनोंके स्थानपर प्राथमिकता पांच सितारा विश्रामालयोंको दी जाती है ।
इसमें आयोगका अपना तर्क है । शासकीय कोषसे चालीस सहस्त्र रुपयेसे अधिकके व्ययके लिए अधिकारियोंको निविदा और टेण्डर जारी करने होते हैं, ताकि प्रतियोगिताकेद्वारा शासनके धनकी बचत हो; लेकिन इसमें ऐसा नहीं हुआ । निर्वाचन आयोगने बिना शासकीय प्रक्रिया अपनाए सीधे पांच सितारा विश्रामालयमें बैठक बुलवा ली !
स्रोत : आजतक
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