पाकिस्तानपर भारतका ‘जल-प्रहार’, रोका नदियोंका जल, केंद्रीय मंत्रीने की घोषणा !


मार्च ११, २०१९

पुलवामामें ‘सीआरपीएफ’के दलपर हुए आतंकी आक्रमणके पश्चात पाकिस्तानके विरुद्घ भारतकी कार्यवाही निरन्तर जारी है । बालाकोटमें आतंकी शिवारोंमें हवाई आक्रमण, पाकिस्तानसे ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’का स्थखन वापस लेनेके पश्चात अब भारतने पाकिस्तानपर जलका प्रहार किया है । भारतने पाकिस्तान जानेवाली नदियोंका जल रोकनेकी घोषणा की हैं । केन्द्रीय जल संसाधन राज्य मन्त्री अर्जुन मेघवालने कहा कि पाकिस्तानकी ओर जानेवाली तीन नदियोंका जल भारतने रोक दिया है ।

राजस्थानमें बीकानेर पहुंचे केन्द्रीय मन्त्री अर्जुन मेघवालने बताया कि पाकिस्तानमें बहनेवाली पूर्वी नदियोंके ०.५३ मिलियन एकड फीट जलको रोक दिया गया है और इसे संग्रहित किया गया है । जब भी राजस्थान या पंजाबको इसकी आवश्यकता होगी, उस जलका उपयोग पीने और सिंचाईके लिए किया जा सकता है ।

१४ फरवरीको पुलवामा आक्रमणके पश्चात भारत और पाकिस्तानके मध्य तनाव चरमपर है । नितिन गडकरीने घोषणा की थी कि सिंधु सन्धिके अन्तर्गत भारत अपने भागका जल पाकिस्तान जानेसे रोक देगा । केन्द्र शासनका यह पग १९६० की ‘सिंधु जल संधि’का उल्लंघन नहीं करता है; क्योंकि भारतने केवल अपने भागके जलको रोका है । भारत अपने भागके जलका उपयोग कर सकता है ।

भारत और पाकिस्तानके मध्य १९६० में सिंधु जल सन्धि हुई थी । यह सन्धि पूर्वकी ओर बहनेवाली नदियां ब्यास, रावी और सतलुजके जलके प्रयोगके लिए हुई है । इस सन्धिके अन्तर्गत भारतको ३.३ कोटि एकड फीट (एमएएफ) जल मिला है, जबकि पाकिस्तानको ८० एमएएफ जल दिया गया है । यहां इस बातपर विवाद है कि इस सन्धिके अन्तर्गत पाकिस्तानको भारतसे अधिक जल मिलता है, जिससे यहां सिंचाईमें भी इस जलका सीमित उपयोग हो पाता है । केवल विद्युत उत्पादनमें इसका अबाधित उपयोग होता है । साथ ही भारतपर परियोजनाओंके निर्माणके लिए भी सटीक नियम बनाए गए हैं ।

 

“पाकिस्तान जैसा धूर्त आतंकी राष्ट्र जलके योग्य नहीं है । ऐसे राष्ट्रोंसे किसी भी प्रकारकी कोई सन्धि नहीं होनी चाहिए । आज तककी की गई सन्धियोंमें भी आस धूर्त राष्ट्रने सदैव ही हमें छला है और न ही कभी पालन किया है; अतः सभी सन्धियोंका अन्तकर किसी भी प्रकारका लेन-देन बन्द होना चाहिए !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : फर्स्टपोस्ट



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