जुलाई २, २०१९
नेशनल कंफ्रेससके नेता और जम्मू-कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री फारूक अब्दुल्लाने सोमवार, १ जुलाईको कहा कि यदि धारा-३७० अस्थायी है, तो भारतमें हमारा विलय भी अस्थायी है ! जब महाराजा हरि सिंहने यह विलय किया, तो यह अस्थायी था । उस समय कहा गया था कि जनमत संग्रह होगा और लोग निर्धारित करेंगे कि उन्हें भारत या पाकिस्तान किसके साथ जाना है; इसलिए, यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे अनुच्छेद ३७० को कैसे हटा सकते हैं ? लोकसभामें बोलते हुए अमित शाहने कहा था कि अनुच्छेद-३७० संविधानका अस्थाई प्रावधान है ।
राज्यमें राष्ट्रपति शासनके विस्तारके बारेमें बात करते हुए अब्दुल्लाने कहा, “उनके पास इसके अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं था । राष्ट्रपति पदका विस्तार अमरनाथ यात्राके कारण आवश्यक था ।” उन्होंने दावा किया कि भारतका चुनाव आयोग चुनाव करानेके लिए सज्ज था; परन्तु केन्द्र शासनने इसे रोक दिया । उन्हें लोकसभा चुनावके पश्चात और अमरनाथ यात्रासे पहले मतदान कराना चाहिए था; क्योंकि सुरक्षा बल यहां थे ।
घाटीमें पर पक्षके साथ वार्ता करनेकी आवश्यकताको बताते हुए अब्दुल्लाने कहा, “सभी के साथ वार्ता होनी चाहिए । यदि हम वास्तवमें इसको हल करना चाहते हैं, जो काफी वर्षोंसे है, तो हमें सभीसे वार्ता करनेकी आवश्यकता है । वाजपेयीजीने वार्ता की, आडवाणीजीने वार्ता की, मुशर्रफने भी वार्ता की, सभीने वार्ता की । इसको केवल वार्ताकेद्वारा हल किया जा सकता है, न कि युद्धोंके द्वारा !”
“अदुल्लाजी यह जान लें कि ३७० हटे या न हटे, कश्मीर भारतका अभिन्न अंग है और रहेगा ! जनमत संग्रहकी बात तो तब करते जब कश्मीर पण्डितोंसे भरा हुआ था । राजा हरिसिंहने सन्धिमें यह नहीं कहा था कि हिन्दुओंको मारकर आतंकियों और जिहादियोंको भर दिया जाएगा और जनमत संग्रह करवाया जाएगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : टाइम्सनाऊ न्यूज
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