फरवरी २३, २०१९
तीन दिवस पूर्व कोलकाताके साल्टलेकमें सेवानिवृत्त आईपीएस गौरव चन्द्र दत्ताने आत्महत्या कर ली थी । उन्होंने अपने हाथकी धमनी (नस) काटी थी । शुक्रवार, २२ फरवरीको गौरव चंद्र दत्ताका लेख सामने आया है, जिसने पश्चिम बंगालकी राजनीतिमें हडकम्प मचा दिया है । दत्ताने आत्महत्याके लिए पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीको उत्तरदायी बताया है । उन्होंने लिखा है, “आदरणीय मैडम मुख्यमन्त्री ! मुझे आशा है कि मेरे इस पगसे आपका काला हृदय परिवर्तित होगा !”
उन्होंने राज्यमें सेवारत आईपीएस अधिकारियोंके लिए भी बडा संदेश लिखा है । उन्होंने लिखा है, “जितने भी आईपीएस अधिकारी काम कर रहे हैं, जो सत्तारूढ दलको सन्तुष्ट करनेके लिए कार्य कर रहे हैं, जो
विधानानुसार कार्य नहीं कर रहे हैं, उन सभीके लिए मैं कहना चाहता हूं कि आप सदैव स्मरण रखिए कि वर्तमान शासनके लिए आप केवल ‘यूज एंड थ्रो’ करनेवाले एक माध्यम मात्र हैं । आज नहीं तो कल आपको अवश्य ही फेंक दिया जाएगा ।
गौरव चन्द्र दत्ताका शव मंगलवार सन्ध्या उनके ‘साल्ट लेक’की सदनिकामें (फ्लैटमें) रक्तरंजित स्थितिमें मिला । उन्हें एक निजी चिकित्सालयमें ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया । पुलिसने बताया कि गौरव चन्द्र दत्ता अपने घरमें एकाकी रहते थे । विधाननगर पुलिस आयुक्तालयके एक अधिकारीने कहा, “हमने प्रकरणकी जांच आरम्भ कर दी है । अस्वाभाविक मृत्युका प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।
आईपीएस गौरव चन्द्र दत्तके प्रकरणकी जांच भाजपाने सीबीआईसे करानेकी मांग की है ।
“इस प्रकरणसे ही ममता बैनर्जी शासनकी वास्तविकताका बोध होता है । ममता शासन तानाशाहीकी ओर ही बढ रहा है । एक ओर बांग्लादेशी धर्मान्धोंको बंगालमें घुसाकर बंगालकी शान्तिको भंग किया तो दूसरी ओर तानाशाहीके कारण सभी शासकीय अधिकारियों व हिन्दू हितैषियोंको उद्विग्न किया जा रहा है । मोदी शासनको उठते-बेबते कोसनेवाले तथाकथित धर्मनिरपेक्षवादी व वामपन्थी भी मौन हैं ! अब ऐसे शासनका शीघ्रातिशीघ्र अन्त आवश्यक है, अन्यथा शान्त बंगालको भी छोटा सीरिया बननेमें समय नहीं लगेगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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