पिछले कुछ वर्षोंसे मंदिरों (हिंदुओंके ) संचालक, प्रबन्धक, विश्वस्तोंसे मिलने पर ध्यानमें आया कि उन्हें मंदिरके संचालन, उसके रख-रखाव, पुनर्निमाण इत्यादि कार्यों में अत्यधिक एवं भिन्न प्रकारके अडचनें आ रही हैं जो उनकी बुद्धिके समझसे परे हैं और वे मुझे अपनी अडचनें बताते हैं ! वैसे ही अनेक हिंदुत्त्ववादियोंके भी घरोंमें, उनके जीविकोपार्जनमें एवं उनके समष्टि कार्य में बुद्धि अगम्य अडचनें आ रही हैं और उनके मनमें यह शंका निर्माण हो रहा है कि जब हम देवताओं, धर्म एवं राष्ट्रसे संबन्धित सत्कार्य कर रहे हैं तो हमें कष्ट क्यों हो रहा है !! तो हिंदुओं इसे ही ‘त्राहि मां’ का काल कहते हैं, हिंदुतत्वपर सूक्ष्म स्तरके बलाढ्य आसुरी शक्तियोंने भीषण प्रमाणमें हिंदुतत्वके अस्तित्त्वको नष्ट कनरे हेतु आक्रमण किया हैं और जो भी हिंदुतत्व संबंधी कार्य कर रहे हैं उनके वैयक्तिक जीवनको अस्थिर करने हेतु एवं समष्टि कार्यको हानि पहुंचाने हेतु सूक्ष्म जगतकी आसुरी शक्तियां सतत आक्रमण कर रही हैं अतः यदि आपके व्यष्टि साधना (स्वयंकी साधना ) का ठोस आधार नहीं होगा तो आप इन अडचनोंका सामना नहीं कर पाएंगे और अपने व्यष्टि और समष्टि कार्यमें यशस्वी नहीं हो पाएंगे; इसलिए सभी हिंदुत्त्वादी यदि अपने कार्यमें यशस्वी होना चाहते हैं और उनका व्यष्टि और समष्टि कार्य निर्विघ्न हो ऐसा चाहते हैं तो अपने अपने इष्टदेवताका मंत्र प्रतिदिन एक घंटे नियमित सुबहमें करें और जप करनेसे पूर्व प्रार्थना कर संकल्प लें – यह जप मैं अपने व्यष्टि एवं समष्टि कार्यमें अनिष्ट शक्ति किसी भी प्रकारका बाधा न दें इस हेतु कर रहा हूं इस प्रकार प्रार्थना एवं संकल्प लेकर एक घंटे जप करें , इस जप को दो या तीन सत्रोंमें विभाजित कर भी किया जा सकता है परंतु यह प्रयास करें कि सुबह ही कम से कम आधे घंटेका जप हो जाये ! आप सभी इस जपको समष्टि स्तरपर एक साथ मारक भाव में भी कर सकते हैं !-तनुजा ठाकुर
आप सभी हमारे जालस्थल के होमपेज पर शिवजी और दुर्गादेवी के तारक एवं मारक भाव से संयुक्त जप को सुन सकते है !
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