मस्जिदमें ‘नमाज’के पश्चात ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’के कट्टरपन्थियोंद्वारा की गई हिंसा 


११ अप्रैल, २०२१
     उत्तरी बांग्लादेशमें कट्टरपन्थी इस्लामिक समूह ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’के कार्यकर्ताओंने एक मस्जिदमें ‘नमाज’ करने आए लोगोंपर प्रहार कर दिया । इस प्रकरणमें १२ लोग चोटिल हुए हैं । बांग्लादेशी ‘मीडिया’के अनुसार, यह प्रकरण शुक्रवार ९ अप्रैलको गाइबांधा जनपदके सिलामोनी मस्जिदका है । नमाजके समय कट्टरपन्थी समूहके लोग मस्जिदके भीतर आए व इमामसे ‘माइक’ छीनकर अपने सङ्गठनके विषयमें बताने लगे, जिसके पश्चात सङ्गठनकी मनमानी देखकर वहां उपस्थित नमाजियोंने इसपर आपत्ति प्रकट की तो उनपर कट्टरपन्थियोंने आक्रमण कर दिया, जिसमें १२ लोग चोटिल हो गए । वहीं पुलिस थानेके मुखिया बुलबुल इस्लामने कहा कि यह प्रहार ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’के कार्यकर्ताओंद्वारा नहीं था; अपितु मस्जिदकी समितिकी परस्पर असहमति इस अप्रिय प्रकरणका कारण है । वहीं मस्जिदके इमाम मतबूल उद्दीनका कहना है कि प्रहार करनेवालोंका अभिज्ञान ‘हिफाजत’के कार्यकर्ताओंके रूपमें हुआ है, जिन्होंने ‘माइक’ छीनकर उनके समूहद्वारा प्रसारित की जा रही हिंसाके समर्थन करने हेतु लोगोंसे कहा था । उल्लेखनीय है कि मस्जिदमें हुई हिंसामें जिस कट्टरपन्थी समूहका नाम है, उसे पाकिस्तानके कुख्यात गुप्तचर विभाग ‘आईएसआई’से जुडे होनेके तथ्य भी समक्ष आए हैं । इस संस्थाको सऊदी अरबसे अत्यधिक धन भी प्राप्त होता है ।
      जिस पन्थके पर्व ही हिंसाको प्रसारित करते हैं, उस पन्थके अनुयायी यदि परस्पर ही एक दूसरेकी हत्या भी कर दें तो इसमें आश्चर्य कैसा ? सम्पूर्ण विश्वमें मात्र सनातन धर्म ही मोक्ष, शान्ति, परस्पर प्रेम व राष्ट्र उत्थानके विषयमें चिरकालसे विचार प्रसारित करता रहा है  व आज भी कर रहा है; परन्तु दुःखद है कि ऐसे महान धर्ममें जन्म लेनेवाले हिन्दू भी स्वयं हिन्दू होनेपर आज गर्व अनुभव नहीं करते ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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