ऑस्ट्रेलियामें १२ वर्षके हिन्दू लडकेको माला धारण करनेके खेलके प्रांगणसे किया बाहर
३१ अगस्त, २०२१
ऑस्ट्रेलियाके ब्रिस्बेनमें भारतीय मूलके १२ वर्षीय हिन्दू फुटबॉल खिलाडी शुभ पटेलको तुलसीकी माला (कंठी माला) पहननेके कारण खिलानेसे मना कर, क्रीडांगनसे बाहर भेज दिया गया । ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’के अनुसार, शुभने ‘रेफरी’से माला उतारनेको नकार दिया, जिसे उसने ५ वर्षकी आयुसे पहना हुआ है । शुभने ‘मीडिया’से बात करते हुए कहा, “केवल एक फुटबॉल प्रतियोगिताके लिए, मैं इसे तोडनेके स्थानपर, मुझे अपने धर्मका पालन करना अधिक प्रिय है ।”
हिन्दू लडकेने बल देकर कहा कि माला उसे आत्मविश्वास देती है और उसे सुरक्षाका अनुभव कराती है; इसके पश्चात शुभ एक ‘कोने’में बैठकर अपनी ‘टीम’को खेलते हुए देखने लगा ।
फुटबॉल क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलियामें फुटबॉल और फुटसलकी शासन निकाय (गवर्निंग बॉडी) है । फुटबॉल क्वींसलैंडने एक जांच आरम्भ की है और इस घटनाके पश्चात शुभ पटेलके परिवार और टूवांग सॉकर क्लबसे क्षमा भी मांगी है । फुटबॉल क्वींसलैंडने एक वक्तव्यमें कहा, “क्वींसलैंडमें फुटबॉल सबसे स्वागत योग्य और समावेशी खेल है, जो सभी संस्कृतियों और धर्मोंका सम्मान करता है ।”
शुभ पटेल जैसे हिन्दू बच्चे, भारतकी संस्कृति और सभ्यताको विदेशीकी भूमिपर भी जीवित रखे हुए है । भारतके बच्चों एवं युवाओंको इसका अनुसरण करना चाहिए । इसीसे ज्ञात होता है कि आरम्मसे ही बालकोंको धर्मपालन सिखाना कितना अनिवार्य है ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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