‘विश्वके १५ राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र बननेके लिए तत्पर, भारत करें आरम्भ’, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती


१४ जनवरी, २०२२
         पुरीके शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजीने प्रतिवाद किया कि भारतद्वारा स्वयंको हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देनेपर १५ राष्ट्र एक वर्षके भीतर इसी दिशामें निर्णय लेंगे । मकर संक्रांतिपर गंगासागरमें पर्व स्नान करने आए शंकराचार्यने १३ जनवरीको (गुरुवारको) संवाददाता सम्मेलनमें कहा, “मेरा ५२ राष्ट्रोंके उच्च प्रतिनिधियोंके साथ चित्रपट सम्मेलनके (वीडियो कांफ्रेंसिंगके) माध्यमसे वार्तालाप हुआ है । वार्तालापमें मारीशस, नेपाल, भूटान सहित १५ राष्ट्रोंके प्रतिनिधियोंने इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि भारत यदि स्वयंको हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देगा, तो इससे प्रेरणा लेकर वे भी अपने राष्ट्रको हिन्दू राष्ट्र घोषित करनेकी दिशामें निर्णय लेंगे ।”
         बांग्लादेशमें हिन्दू देवी-देवताओंकी प्रतिमाएं भङ्ग किए जानेपर शंकराचार्यने दुःख प्रकट करते हुए कहा, “जब भारतमें अल्पसंख्यक सहजतासे रह सकते हैं, तो बांग्लादेशमें हिन्दू सुरक्षित क्यों नहीं रह सकते ?  हिन्दू देवी-देवताओंका विश्वमें कहीं भी अपमान सहन नहीं किया जा सकता । नेपाल चीनके अधीन हो गया है । वह उसके हाथोंका यन्त्र बनता जा रहा है । इस सन्दर्भमें हमारी विदेश नीति निर्बल सिद्ध हुई है ।” शंकराचार्यने आगे कहा, “तीर्थ स्थलोंको पर्यटन स्थलोंमें परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए । तपोभूमिको भोग भूमिका रूप देना उचित नहीं है ।” उन्होंने शासनसे गंगासागर मेलेको विश्व स्तरका तीर्थ स्थल घोषित करनेका आह्वान किया ।
      जब विश्वमें अनेक ‘इस्लामिक’ एवं ‘ईसाई’ राष्ट्र हो सकते हैं, तो भारत हिन्दू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता ? वर्तमानमें अनेक राष्ट्रोंने हिन्दू धर्मकी व्यापकताको माना है तथा एक धर्माधारित राष्ट्रही विश्वका योग्य मार्गदर्शन कर सकता है । भारतके केन्द्र एवं राज्य शासन अब मिलकर शंकराचार्यजीके इस वक्तव्यपर गम्भीरतासे विचार करें तथा भारतको शीघ्र  हिन्दू राष्ट्र अर्थात एक धर्माधारित राष्ट्र घोषित करें !  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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