जनवरी ९, २०१९
देशके सुरक्षा विभागने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नेपालके मदरसों-मस्जिदोंमें कट्टरपन्थकी पाठशालाका नूतन सम्पर्क उजागर किया है । विभागके पास विद्यमान गुप्त लिखितपत्रोंमें इस बातका वर्णन है कि पश्चिमी उत्तरप्रदेशके १५ लोग नेपालके बारा जनपदमें स्थित एक मस्जिदमें मुस्लिम युवाओंको धर्मके लिए प्रेरित करनेके उद्देश्य से गए थे और वे रक्सौलके रास्ते भारत वापस आ सकते हैं । सुरक्षा विभाग इनकी गतिविधियोंपर रॉ और आईबीके द्वारा दृष्टि बनाए हुए हैं । इनके आईएस प्रेरित समूहसे सम्पर्कको खोजनेका प्रयास हो रहा है ।
सुरक्षा विभागकी उच्च स्तरीय बैठकमें साझा किए गए लिखितपत्रके अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेशके शामली जनपदसे १५ लोग नेपालके बारा जनपदमें स्थित कचोरवा गांव, सिमोनगर थानाके अन्तर्गत स्थित एक मस्जिदमें जनवरीमें गए और वहां कई दिवस रुके । इनको वहांपर मुस्लिम समुदायसे जुडे सुन्नी युवाओंको प्रशिक्षण देनेका उत्तरदायित्व दिया गया था । मदरसों और कुछ अन्य मस्जिदोंमें प्रशिक्षणके पश्चात इन्हें रक्सौलके रास्ते वापस आना था ।
कट्टरपन्थकी पाठशालासे जुडे लोगोंके नाम भी लिखितपत्रोंमें प्रविष्ट हैं; परन्तु अभी विभाग इनका अभिज्ञान सार्वजनिक नहीं कर रहा हैं । विभागको आशंका है कि कई और लोग इस प्रकरणसे जुडे हो सकते हैं ।
सुरक्षा विभागसे जुडे एक अधिकारीने कहा कि इस पूरे क्षेत्रमें कट्टरपन्थ बडी चुनौतीके रूपमें सामने आ रहा है । युवाओंको कट्टरपन्थमें फंसाकर उन्हें आतंकी षडयन्त्रका भाग बनानेका प्रयास हो रहा है । विभाग पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नेपालके धार्मिक संस्थानोंके मध्य उत्पन्न आपसी सम्पर्कके मध्य पाकिस्तानी सम्पर्क भी खोज रहा है ।
“इस्लामिक कट्टरपन्थी अब भारतके साथ-साथ विश्वके एकमात्र हिन्दू राष्ट्रमें भी अपना विष प्रसारित करने लगे हैं । इससे पूर्व नेपाल भी इस्लामिक विषसे पीडित हो, वहां शासनको सचेत होना चाहिए और यही परिणाम होता है लोकतन्त्रका । जबतक वहां राजाका शासन था, नेपाल पूर्णतया हिन्दू राष्ट्र था, जबसे यह लोकतन्त्र बना है, दुर्गतिकी ओर अग्रसर हो चला है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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