जनवरी ८, २०१९
२०१३ में मुजफ्फरनगर उपद्रवके सभी ७ आरोपियोंको स्थानीय न्यायालयने आजीवन कारावासका दण्ड सुनाया है । कवाल गांवमें हुए उपद्रवमें गौरव और सचिनकी हत्याके सात आरोपी मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, नदीम जहांगीर, अफजल और इकबालको यह दण्ड सुनाया गया है ।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगरमें २०१३ में हुए सांप्रदायिक संघर्षमें कमसे कम ६० लोगोंकी मृत्यु हो गई थी, जबकि ४० सहस्रसे अधिक लोग विस्थापित हुए थे । मुजफ्फरनगर उपद्रवको लेकर अखिलेश यादव शासन देशव्यापी आलोचनाके घेरेमें आ गया था । लंबे समयतक अल्पसंख्यक समुदाय लोगोंको पुनर्वास शिविरोंमें रहना पडा । इनकी आंच बीजेपीके पश्चिमी उत्तरप्रदेशके बडे नेताओं जैसे संगीत सोम, सुरेश राणा और संजीव बालियानपर भी आई थी। इनमें तत्कालीन सपा शासनके मंत्री आजम खानपर भी प्रभाव डालनेके कथित आरोप लगे थे ।
पांच आरोपियोंद्वारा दो युवाओंको मार दिया गया था । इसके बाद दो अन्य आरोपियों अफजल और इकबालके विरुद्घ साक्ष्य सामने आनेके पश्चात ‘धारा- ३१९’के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । न्यायालयने १० साक्ष्यों और छह बचाव करनेवालोंका पक्ष सुननेके पश्चात सात आरोपियोंको दोषी बताया गया था ।
यह घटना २७ अगस्त २०१३ को हुई थी । सात आरोपियोंमें से दो जमानतपर बाहर हैं, जबकि पांच आरोपी गत पांच वर्षोंसे कारावासमें बंद हैं । सचिन और गौरवकी मोटरसाइकिल शहनवाजकी मोटरसाइकिलसे भिड गई थी । अन्य स्थानीय लोग भी वहां उपस्थित थे । इसके पश्चात दोनोंकी हत्या कर दी जाती है । बादमें शहनवाजकी भी हत्या हो जाती है ।
“इन उपद्रवमें अनेक घोषित और अघोषित हिन्दू मारे गए थे, जिनकी संख्या भी नहीं की गई ! क्या केवल आजीवन कारावास इसका उचित न्याय है ? ऐसे दुर्दान्त आतंकियोंको मृत्युदण्ड ही देना चाहिए । ऐसे विषकारी मानसिकताकज लोग जितना समय धरतीपर होंगें, विष प्रसारित करेंगें; अतः मृत्युदण्ड ही उचित प्रावधान है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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