2020 तक भारत के 21 शहरों में भूमिगत जल पूरी तरह खत्म हो जाएगा


क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि किसी एक सुबह आपके घर में पानी पूरी तरह ख़त्म हो जाए और तमाम कोशिशों के बावजूद आपको कहीं भी पानी उपलब्ध न हो. और फिर आपको पता चले कि आपके पूरे शहर में ही पानी नहीं है. आप सोचेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता हैं लेकिन पूरी दुनिया में जिस तरह स्वच्छ पानी की लगातार कमी हो रही हैं, उसे देखकर लगता है कि ऐसे बुरे दिन कभी भी आ सकते हैं. अगर लोग अब भी ना संभले तो कभी ऐसा भी हो सकता है कि पीने के पानी के कूपन दिए जाएंगे और रोज़ाना नहाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. ये स्थिति हमारे देश में तो नहीं आई है लेकिन इस समय South Africa के केपटाउन शहर में ऐसे ही हालात हैं . हालांकि ये सुनकर खुश होने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि पानी के मामले में भारत की हालत लगातार ख़राब हो रही है.

आज World Water Day यानी विश्व जल दिवस है और इस मौके पर भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में पानी बचाने की कसमें खाई जा रही हैं. ऐसे मौकों पर अक्सर हमारा सिस्टम सेमिनार और स्लोगन वाले कार्यक्रमों तक सीमित हो जाता है जबकि देश के लोग Facebook, WhatsApp और  twitter पर पानी बचाने के संदेश भेजने की रस्म निभाते हैं. भारत के नज़रिए से देखा जाए तो हमारा समाज और हमारा सिस्टम, इस पानी की असली कीमत को समझ नहीं पाया है. हमारे देश में पानी को मुफ़्त की चीज़ समझा जाता है.. और उसे बिना किसी हिचक के बर्बाद किया जाता है. आपने भी ऐसा कई बार किया होगा. कई बार आप एक गिलास पानी में से एक या दो घूंट पानी पीकर, बाकी का बचा हुआ पानी फेंक देते होंगे.. ये भी पानी की बर्बादी है. और ये हमें विनाश की तरफ ले जा रही है.

United Nations की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में करीब 200 करोड़ लोग ऐसा पानी पीने पर मजबूर हैं, जो पूरी तरह से दूषित है. गंदा पानी पीने की वजह से हर साल दुनिया में 5 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है.

World Health Organisation के मुताबिक दुनिया के करीब 85 करोड़ लोग पीने के पानी की कमी से संघर्ष कर रहे हैं जबकि दुनिया के 200 शहरों में पानी का गंभीर संकट आ चुका है. इनमें South Africa के शहर केपटाउन की हालत सबसे ज़्यादा ख़राब है जहां पानी ख़त्म होने की तारीख़ तय कर दी गई है ये तारीख़ है 16 अप्रैल 2018 यानी आज से ठीक 24 दिन बाद केपटाउन में पानी..खत्म हो जाएगा

इस स्थिति को Day Zero कहा जाता है. Day Zero  का मतलब है वो दिन जब नल में पानी आना बंद हो जाएगा…आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के 200 शहर Day Zero की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं इस लिस्ट में भारत का Bengaluru शहर भी शामिल है.बिना प्लानिंग के शहरीकरण और गांवों में अतिक्रमण की वजह से बेंगलुरु के करीब 80% तालाब खत्म हो चुके हैं और पिछले 20 वर्षों में Water Level 9 गुना नीचे गिर चुका है. जबकि दिल्ली-NCR में पानी का स्तर हर साल 1 मीटर से ज़्यादा गिर रहा है.

World Bank की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 तक भारत के 21 शहरों में भूमिगत जल पूरी तरह खत्म हो जाएगा. अगर इस स्थिति को नहीं रोका गया तो वो दिन दूर नहीं है जब देश के ज़्यादतर इलाकों मे Day Zero वाला संकट दिखाई देगा . Central Ground Water Board और Pre-monsoon water level data के विश्लेषण से ये पता चलता है कि भारत के 61 प्रतिशत कुओं का जलस्तर बहुत कम हो चुका है .भारत के जल-संसाधन मंत्रालय के मुताबिक देश के कुल 13 राज्य… यानी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान के 300 ज़िलों में पीने लायक पानी की कमी है.

अगर आप भारत के किसी ऐसे शहर या गांव में रहते हैं जहां से कोई नदी गुज़रती है और आप से सोचते है कि जल का संकट आप तक नहीं पहुंचेगा तो आप गलत सोच रहे हैं. UNESCO की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2050 तक भारत की सभी नदियों का पानी पीने लायक नहीं रहेगा यानी भारत….पानी वाली कंगाली की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में पानी का संरक्षण नहीं किया गया तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है.

अंतर्राष्ट्रीय संस्था WaterAid के मुताबिक ग्रामीण भारत में करीब 6 करोड़ 30 लाख लोग ऐसे हैं, जिनकी पहुंच साफ पानी तक नहीं है. इसके अलावा दुनिया भर के 10 प्रतिशत प्यासे लोग भारत में रहते हैं .भारत में प्रति वर्ष Per Capita Water Availability की बात करें, तो इसके आंकड़े आपको परेशान कर सकते हैं.वर्ष 1951 में भारत में प्रति व्यक्ति -54 लाख 10 हज़ार लीटर पानी प्रतिवर्ष उपलब्ध हुआ करता था, जो सन 1991 में  23 लाख 1 हज़ार लीटर हो गया, सन 2001 में 19 लाख 2 हज़ार लीटर हो गया और 2011 में 15 लाख 88 हज़ार लीटर प्रति वर्ष रह गया .जबकि वर्ष 2025 में भारत में Per Capita Water Availability सिर्फ 13 लाख 99 हज़ार लीटर रह जाएगी.. यानी प्रतिदिन करीब 3 हज़ार 800 लीटर पानी प्रति व्यक्ति उपलब्ध होगा

वर्ष 2050 तक पूरी दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी ऐसे इलाकों में रहने लगेगी, जहां पानी की बहुत ज्यादा कमी है.यहां आपके लिए ये समझना भी ज़रुरी है, कि भारत सहित पूरी दुनिया तक स्वच्छ पानी क्यों नहीं पहुंच पाता और भविष्य में क्या हो सकता है ?  आज हमने रिसर्च की मदद से इसकी वजहों को तलाशने की कोशिश की है.सबसे बड़ी वजह है, जनसंख्या.. फिलहाल दुनिया की जनसंख्या 750 करोड़ है. वर्ष 2030 तक पूरी दुनिया की आबादी 850 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है, जबकि वर्ष 2050 तक ये आंकड़ा 970 करोड़ तक पहुंच जाएगा. ऐसी स्थिति में पानी की मांग भी बहुत ज़्यादा होगी.

कुछ अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक 2022 तक भारत की जनसंख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा हो जाएगी. 2022 से 2030 के बीच भारत की जनसंख्या 150 करोड़ के आंकड़े को पार कर सकती है. इसके अलावा 2050 तक भारत के शहरों की आबादी में 55 फीसदी से भी ज़्यादा का इज़ाफा होगा यानी आने वाले समय में भारत की प्यास और बढ़ने वाली है. आज़ादी के 70 साल बाद भी लोगों को शुद्ध पानी पीने का स्वराज नहीं मिल पाया है.



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