आतंकी अजमल कसाबके अन्तिम शब्द थे, ‘आप जीत गए, मैं हार गया’


नवम्बर १२, २०१८

२६ नवम्बर, २००८ को देशमें हुए अब तकके सबसे भीषण आतंकी आक्रमणमें १६६ लोगोंके प्राण चले गए थे । इसी माह इस घटनाके १० वर्ष होने जा रहे हैं । पाकिस्‍तानसे आए १० आतंकियोंने उसे किया था, उनमें से एक अजमल आमिर कसाबको जीवित पकडा गया था । बादमें उसको फांसी दे दी गई । ‘लश्‍कर-ए-तैयबा’के आतंकी अजमल आमिर कसाबसे जिस वरिष्ठ पुलिस इंस्‍पेक्‍टर रमेश महालेने सबसे पहले पूछताछ की थी, उनसे अपने अन्तिम समयमें कसाबने कहा था, ”आप जीत गए, मैं हार गया !” भारतके विरुद्घ युद्ध छेडने सहित ८० प्रकरणमें दोषी ठहपाएराए गए कसाबने अपनी फांसीसे एक दिवस पूर्व यह बात रमेश महालेसे की थी ।

‘द हिंदुस्‍तान टाइम्‍स’के विवरणके अनुसार २०१३ में सेवानिवृत्त हुए महालेने बताया कि जब तक कसाबको न्यायालयद्वारा मृत्युका निर्णय नहीं दिया गया, तब तक उसको विश्वास था कि वह भारतीय विधानसे बच जाएगा ! इस सम्बन्धमें एक घटनाका वर्णन करते हुए महालेने कहा, ”जब कसाबको पकडा गया तो उसके डेढ माह पश्चात् एक दिवस मैं उससे पूछताछ कर रहा था तो उसने कहा था कि उसको उसके दोषोंके लिए फांसी दी जा सकती है; लेकिन भारतीय न्‍यायिक व्‍यवस्‍थामें फांसीका दण्ड देना सरल नहीं है । कसाबने संसद आक्रमणके दोषी अफजल गुरूका उदाहरण देते हुए कहा था, न्यायालयद्वारा उसको फांसीका दण्ड देनेके आठ वर्ष पश्चात् भी लटकाया नहीं जा सका है ।” महाले उस दिवस यह बात सुनकर चुप रह गए थे । उल्‍लेखनीय है कि बादमें अफजल गुरूको भी फांसी दे दी गई ।

इसके लगभग चार वर्ष पश्चात् ११ नवम्बर, २०१२ को विशेष न्यायालयने कसाबको मृत्युदण्ड दिया, उसके पश्चात् तत्‍कालीन पुलिस कमिश्‍नर डॉ सत्‍यपाल सिंहने कसाबकी फांसीके लिए उसे पुणेकी यरवदा जेलमें जब भेजनेका निर्णय किया तो जिस विशेष दलको वहां तक पहुंचानेका उत्तरदायित्व सौंपा गया, उसमें महाले भी थे ।
उस सन्दर्भमें १९ नवम्बरकी रात्रि जब स्थानान्तरित करनेके लिए महाले, कसाबकी जेलमें पहुंचे तो उन्‍होंने कसाबसे कहा कि स्मरण है ?, चार वर्ष भी नहीं हुए  (जब कसाबने कहा था कि उसे भारतमें फांसी नहीं होगी) ! उस समय कसाबने उत्तर दिया था, ”आप जीत गए, मैं हार गया !”

उसके बाद मुंबईसे पुणेकी लगभग साढे तीन घंटेकी यात्राके मध्य वह एक शब्‍द भी नहीं बोला था । मृत्युका भय उसके मुखपर स्पष्ट महसूस किया जा सकता था । २१ नवम्बरको अजमल कसाबको फांसी दे दी गई । उसको स्मरण करते हुए महालेने कहा, ”जब मैंने सुना कि उसको फांसी दे दी गई तो वह मेरे जीवनके सबसे उत्तर पलोंमें से एक था, क्‍योंकि न्‍याय हुआ और बुराईका अन्त हुआ !”

 

“एक आतंकीकी भारतके शासन तन्त्र व न्यायतन्त्रपर इतनी निष्ठा स्पष्ट करती है कि स्वतन्त्रताके पश्चात् हमने कितनी प्रगति की है और कितने लोगोंको न्याय मिला है ! क्या यह सब इस विधर्मी लोकतन्त्रकी देन नहीं ? क्या न्यायमें देरी अन्याय नहीं ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज 



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