१६ जनवरी, २०२२
“इस समय नियन्त्रण रेखा विगत वर्षकी तुलनामें अच्छी स्थितिमें है; परन्तु आतङ्कियोंको शरण देनेके अपने स्वभावके कारण पाकिस्तान विवश है । ‘पाकिस्तानी’ सीमापर स्थित प्रशिक्षण शिविरोंमें, अनुमानित ३०० से ४०० आतङ्कवादी भारतमें घुसपैठ करनेकी सिद्धता कर रहे हैं । सेनाने प्रत्युत्तरके रूपमें कार्यवाही करते हुए १४४ उग्रवादियोंको मार दिया है । पाकिस्तान ‘ड्रोन’के माध्यमसे अस्त्र-शस्त्रोंकी तस्करी करनेका भी प्रयास कर रहा है”, ऐसी जानकारी सैन्य दलके प्रमुख ‘जनरल’ मनोज नरवणेने दी है । भारतीय सेनाद्वारा प्रतिवर्ष १५ जनवरी ‘भारतीय सेना दिवस’के रूपमें मनाया जाता है । सेनाके ७४ वें स्थापना दिवसके अवसरपर ‘जनरल’ नरवणेने देशको शुभकामनाएं दी हैं । जनरल नरवणेने आगे कहा है कि, ‘कोरोना महामारीके समय अपने पडोसियोंके साथ भारतका सहयोग और बढा है । संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेनामें भारतीय सेनाका सदैव ही विशेष योगदान रहा है । आज भी, विभिन्न शान्ति (पीस कीपिंग) अभियानोंके लिए, ५ सहस्रसे अधिक भारतीय सेनाके सैनिक नियुक्त किए गए हैं । इससे देशकी एक पृथक छवि निर्मित हो रही है ।’
आतङ्कवादी, पृथकवादी, राष्ट्रद्रोही व मानवताद्रोही तत्त्वोंको पोषित करनेवाले सम्बन्धित सङ्गठनों व राष्ट्रोंका यथासमय नष्ट होना अपरिहार्य है अन्यथा कालान्तरमें विश्वके व्यापक भूमण्डलमें इनके आसुरी दुष्प्रभाव, विस्तार व सङ्क्रमणसे सर्वत्र त्राहिमाम व तीव्र सन्ताप सभीको भोगने पड सकते हैं; जिससे मानवताके आध्यात्मिक विकासकी यात्रा अनेक शताब्दी पिछड सकती है; अतः सभी क्षेत्र, कार्यक्षेत्र व सम्प्रदायके हिन्दुओंको भारतवर्षमें हिन्दू राष्ट्रकी पुनर्स्थापनाके लिए सतत कृतिशील रहना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
साभार : https://sanatanprabhat.org/hindi
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