‘आरएसएसकी कब्र खुदेगी, जामियाकी धरतीपर’, ‘दंगा’ आरोपित सफूरा जरगरके समर्थनमें उकसाऊ उद्घोष-प्रदर्शन, ‘थीसिस’ समयपर प्रस्तुत नहीं करनेके कारण निरस्त हुआ था ‘एडमिशन’


६ सितम्बर, २०२२
       देहलीमें हुए हिन्दू विरोधी उपद्रवोंकी आरोपित और तथाकथित मुसलमान ‘एक्टिविस्ट’ सफूरा जरगरका ‘एडमिशन’ निरस्त किए जानेके पश्चात ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी’के छात्रोंने विरोध प्रदर्शन किया । इस मध्य इन छात्रोंने उकसाऊ उद्घोष भी लगाए । सफूरा जरगर फरवरी २०२० में राष्ट्रीय राजधानीमें हुए उपद्रवोंकी आरोपित हैं, जो अभी प्रतिभूतिपर बाहर चल रही हैं । गर्भवती होनेके कारण मानवीय आधारपर न्यायालयने उन्हें प्रतिभूति दे दी थी ।
      जामियाके छात्रोंने प्रदर्शनके मध्य ‘आरएसएस’की कब्र खुदेगी, जामियाकी धरतीपर’ और ‘एबीवीपीकी कब्र खुदेगी, जामियाकी धरतीपर’ जैसे उकसाऊ उद्घोष भी लगाए । सफूरा जरगरने अपना ‘थीसिस’ पूरा नहीं किया था और इसमें कोई प्रगति भी दिखाई नहीं दे रही थी, जिसके पश्चात जामियाने उनका ‘एडमिशन’ निरस्त कर दिया । ५ ‘सेमेस्टर’ होनेपर भी उन्होंने अपनी ‘M.Phil’की ‘थीसिस’ प्रस्तुत नहीं की थी । अब छात्र ‘पोस्टर-बैनर’ लेकर उनके समर्थनमें उद्घोष और विरोध प्रदर्शनके लिए उतरे हैं ।
      सफूरा जरगर उस षड्यन्त्रका भाग थीं, जिसमें भारत शासनको अस्थिर करनेके लिए ‘खून-खराबे’ किए गए थे । देहली उच्च-न्यायालयने उसी वर्ष जूनमें उन्हें मानवीय आधारपर प्रतिभूति दे दी थी ।
      न्यायालयने भले ही मानवीय आधारपर सफूरा जरगरका प्रतिभूति दे दी हो; किन्तु जिहादीको समाजमें छोडना पुनः समाजको दिशाहीन करने हेतु एक और अवसर देनेके समान है । जिसने समयसे अपना अध्ययन पूर्ण न किया हो और उसपर राजनीति करे तो ऐसे लोगोंका चरित्र स्वतः ही स्पष्ट होता है । ‘पुलिस’को सफूरापर कठोर दृष्टि रखनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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