सूक्ष्म इन्द्रियोंको जागृत कर उन्हें विकसित करनेके लाभ (भाग – ४)


कलियुगमें अदृश्य आसुरी शक्तियोंका प्रकोप सदैव ही रहनेवाला है ।  उन शक्तियोंसे रक्षण हेतु स्वयं ही सतर्क होकर सर्व प्रयास करने पडेंगे ।  ऐसी अनिष्ट शक्तियां नित्य नूतन युक्तियां विकसित कर साधकोंके मार्गमें अवरोध निर्माण किया करेंगी, अतः सूक्ष्म इन्द्रियोंका जागृत रहना अति आवश्यक है । ऐसे ही सूक्ष्म अवरोधोंके कारण  वर्तमान कालमें अधिकांश लोग एक सामान्यसी सत्यनारायण भगवानकी पूजा भी निर्विघ्न नहीं कर पाते हैं ।  इसी प्रकार अनेक व्यक्ति कहते हैं कि जब भी घरमें कोई धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठान रहता है तो बिना कारण अनेक व्यवधान निर्माण होने लगते हैं ।  यदि आपकी सूक्ष्म इन्द्रियां जागृत होंगी तो अनिष्ट शक्तियोंके पूर्व नियोजनको सरलतासे समझकर उसपर योग्य उपाय योजना निकाल सकते हैं ।  यह कोई नूतन बात नहीं है, हमारी संस्कृतिमें विघ्नहर्ता गणेशकी पूजा, शंख फूंकना, पूजा स्थानको देसी गायके गोबरसे लीपना इत्यादि अनेक अनुष्ठान या धार्मिक कृतियां, आसुरी शक्तियां कार्यमें विघ्न न डालें इसलिए बताई गईं हैं; किन्तु आज सर्व सामान्य हिन्दूको इस मूलभूत सिद्धान्तका विस्मरण हुआ है; इसलिए आजके असतर्क बुद्धिवादी गृहस्थके जीवनमें प्रत्येक क्षण एक नूतन व्यवधान उपस्थित हो जाता है इसका बुद्धिसे कारण ज्ञात नहीं हो पाता है, जिससे उनका जीवन क्लेशप्रद हो जाता है । – तनुजा ठाकुर (२७.४.२०१८)



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