सूक्ष्म इन्द्रियोंको जागृत कर उन्हें विकसित करनेके लाभ (भाग – ७)


सूक्ष्म इन्द्रियोंके जागृत होनेसे हमें लोगोंका अभिज्ञान (पहचान) करना सरल हो जाता है | सूक्ष्म इन्द्रियोंके माध्यमसे कौन सा व्यक्ति सात्त्विक है या राजसिक या तामसिक है, यह भी हम समझ सकते हैं | तामसिक व्यक्ति स्वार्थी होता है और उससे हमें हानि हो सकती है; अतः उनसे दूरी बनाये रखना चाहिए | तामसिक व्यक्तिका वलय सामान्यत: काला होता है और उसके साथ रहनेसे व्यसन या अन्य कष्ट होनेकी संभावना होती है, ऐसे लोगोंको अनिष्ट शक्तियोंका भी तीव्र कष्ट होता है; अतः उनके साथ ही ही थालीमें खानेसे या उनके वस्त्र उपयोगमें लानेसे भी हमें अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट हो सकता है; अतः ऐसे लोगोंके संसर्गमें अधिक समय नहीं रहना चाहिए | पढा-लिखा या आधुनिक शिक्षण प्रणालीसे शिक्षित व्यक्ति और बाह्य रूपसे सभ्य दिखाई देनेवाला व्यक्ति भी तामसिक हो सकता है एवं कोई अस्वच्छ, अशिक्षित व्यक्ति भी सात्त्विक हो सकता है | सूक्ष्म इन्द्रियोंके जागृत होनेसे हमें उनके वलयका त्वरित आभास होता है और हमें यदि सावधान होनेकी आवश्यकता है तो हम सतर्क हो जाते हैं | पूर्वकालमें इसका भान सभीको रहता था इसलिए अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट भी अल्प प्रमाणमें था | आज पुनः इस विधाको सीखनेकी आवश्यकता है | (३०.४.२०१८)

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution