मार्च २, २०१९
१९७१ के युद्धमें भारतकी सेनाने बलिदान देकर पाकिस्तानके २ भाग कर दिए, सेनाने कई सैनिकोंका बलिदान दिया और एक विश्व कीर्तिमान भी स्थापित किया ।
पाकिस्तानके ९३ सहस्र सैनिकोंको भारतीय सेनाने बंधक बनाया, भयके मारे पाकिस्तानके ९३ सहस्र सैनिकोंने भारतीय सेनाके समक्ष समर्पण किया था । भारतके अधिकारमें पाकिस्तानके ९३ सहस्र सैनिक थे; परन्तु पकिस्तानके पास भारतके ५४ सैनिक थे, उनकी सूचि यहां दी है –
इंदिराने ९३ सहस्र पाकिस्तानी सैनिकोको ऐसे ही लौटा दिया, इन ९३ सहस्र पाकिस्तानियोंको हमारी सेनाने सरलतासे नहीं, वरन अपना बलिदान देकर बंधक बनाया था । भारत उस समय पाकिस्तानसे ‘पीओके’ भी वापस ले सकता था, ये सभी सैनिट अधिकतर पाकिस्तानी पंजाबके थे, और पाकिस्तान इनको ऐसे ही छोड नहीं सकता था । इंदिराने ९३ सहस्र सैनिक छोडे; परन्तु पाकिस्तानके अधिकारमें भारतके ५४ सैनिकोंको नहीं छुडवा सकी ।
आजतक ये नहीं ज्ञात हुआ कि हमारे उन ५४ सैनिकोंका क्या हुआ ?, जो १९७१ में पाकिस्तानके युद्धबंदी बन गए थे, ये उनकी सूचि है –
कांग्रेससे क्या कोई एक प्रश्न भी पूछेगा ?, ९३ पाकिस्तानी सहस्र सैनिकोंको छोडनेवालोसे आजतक किसी समाचार माध्यमने भारतके ५४ सैनिकोंको लेकर एक प्रश्न भी नहीं पूछा है !!
“हमारा देश स्वतन्त्रताके पश्चातसे ही एक परिवारके बन्धनमें रहा और ९३,००० सैनिकोंके स्थानपर ‘पीओके’ और देशके सपूतोंको या तो वह नेता ले सकता है, जिसमें प्रखर राष्ट्रभक्ति हो या वह जिसका अपना बालक सेनामें हो ! दोनोंके अभावमें इस देशका दुर्भाग्य ही था कि आजतक निर्णय क्षमता व राष्ट्रप्रेमकी न्यूनतावाले नेता ही देशपर राज्य करते आए हैं । अब भारतको इस मानसिकतासे निकलनेकी आवश्यकता है; क्योंकि कब हम और खोनेकी स्थितिमें नहीं है !इसके लिए यह राष्ट्र आजतक सत्ता भोगते आए नेताओंसे उत्तर मांगना आरम्भ करें; अन्यथा यह राष्ट्र ऐसे ही सत्ताधारियोंकी गेंद बनकर उछाला जाता रहेगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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