जम्मू-कश्मीरमें ‘लश्कर-टीआरएफ’के ९०० से अधिक समर्थक बन्दी, अमुसलमानोंकी लक्ष्य केन्द्रित हत्याके पश्चात सुरक्षाबलोंनेकी बडी कार्यवाही
११ अक्टूबर, २०२१
जम्मू-कश्मीरमें सुरक्षाबलोंने बडी कार्यवाही करते हुए ‘लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल बद्र और ‘टीआरएफ व रेजिस्टेंस फ्रंट’के ९०० से अधिक ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’को बन्दी बनाया है । इस कार्यवाहीमें अभिरक्षामें लिए गए सन्दिग्धोंसे विभिन्न अभिकरण (एजेंसियां) पूछताछ कर रहे हैं । अभिकरण जम्मू-कश्मीरमें अल्पसंख्यक समुदायके लोगोंकी लक्ष्य केन्द्रित हत्याके पीछेके उद्देश्य और कार्य करनेकी युक्तिको समझने और उनकी कडियोंको परस्पर जोडनेका प्रयास कर रहे हैं ।
‘सीएनएन न्यूज’ १८ ने सूत्रोंके माध्यमसे बताया कि कश्मीरमें आतङ्कियोंद्वारा अल्पसंख्यक नागरिकोंपर किए गए आक्रमणके पश्चात, यह अबतक की सबसे बडी कार्यवाही है और अभिकरण जानना चाह रहे हैं कि आतङ्की जम्मू-कश्मीरके अल्पसंख्यक समुदायके लोगोंको ही क्यों लक्ष्य बना रहे हैं ?
सूत्रोंने बताया कि ‘टीआरएफ’के ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ कुछ समय पूर्व ही प्रमुख कार्यकर्ताके रूपमें सामने आए हैं और लक्ष्य केन्द्रित हत्या कर रहे हैं । अभिकरणोंका मानना है कि ‘टीआरएफ’ पाकिस्तान स्थित आतङ्की सङ्गठन ‘लश्कर-ए-तैयबाका ही एक भाग है । विदित हो कि ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ उन लोगोंको कहा जाता है, जो आतङ्कियोंको सहायता उपलब्ध कराते हैं । इनमें रहनेके लिए, घरसे लेकर सभी सुविधाएं सम्मिलित हैं ।
‘सीएनन न्यूज’ १८ ने विश्वस्त सूत्रके मधायमसे लिखा है, हम हिंसाके स्वरूपमें परिवर्तन देख सकते हैं । वे एक बहुत ही मुख्य सन्देश देना चाहते हैं कि अमुसलमानों और अल्पसंख्यकोंको स्वीकार नहीं किया जाएगा । इन आतङ्की समूहोंको नूतन ‘डोमिसाइल एक्ट’ और नई चुनावी प्रक्रियासे समस्या है । ये बहुत सरल लक्ष्य होते हैं । वे वही हैं, जो समाजमें और कश्मीरके लिए कार्य कर रहे हैं ।
कश्मीर घाटीकी गत कुछ घटनाएं १९८९-९० के समयका स्मरण करवाती हैं, जो कि बहुत चिन्ताजनक है । सुरक्षाबलों तथा गुप्तचर सङ्गठनोंके सतर्क होनेके पश्चात भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं; क्योंकि स्थानीय भारत विरोधियोंको पाकिस्तानका प्रश्रय मिल रहा है; अतः समाधान केवल पाकिस्तानका विनाश ही है, जिसे भारतको ही करना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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