नित्य क्रिया आवश्यक है
• आयुर्वेदके अनुसार सवेरे उठते ही सबसे पहले मल-मूत्र त्याग करना चाहिए । प्रातः पेट स्वच्छ होनेसे हमें स्वस्थ रहनेमें अत्यधिक सहयोग मिलता है । इससे शरीरमें हलकापन और स्फूर्ति रहती है और दिनभरके कार्योंके लिए ऊर्जा बनी रहती है । आयुर्वेदके अनुसार सवेरे उठते ही २ से ३ गिलास पानी पीना स्वास्थ्यके लिए अत्यधिक लाभकारी होता है । इससे उच्च रक्तचाप, ‘कब्ज’, अपच, नेत्ररोग और मोटापा आदि रोगोंको दूर करनेमें लाभ मिलता है ।
प्रातः शौच खुलकर आए या आपको मलावरोध (कब्ज) होता हो तो इस हेतु निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं :
१. आप रात्रिमें सोनेसे दो घण्टे पूर्व ‘गर्म’ दूध पीकर सो सकते हैं एवं सोनेसे पूर्व उष्ण जलका सेवा करके सो सकते हैं ।
२. आठ घण्टे पूर्व ताम्र पात्रमें रखे एकसे सवा लीटर जलका सेवन प्रातः कुल्लाकर करें, तत्पश्चात ‘सैर’, योगाभ्यास या व्यायाम कर सकते हैं ।
३. रात्रिमें सोते समय इसबगोल या त्रिफला चूर्णका एक चम्मच सेवन कर सकते हैं ।
४. लगभग ८-१० ग्राम मनुक्का रातको पानीमें भिगा दें ! प्रातः इसके बीज निकालकर दूधमें उबालकर खाएं, और दूध पी लें !
५. रातमें सोते समय एक गिलास ‘गर्म’ दूधमें १-२ चम्मच एरण्डका तेल डालकर पिएं ! मलावरोध दूर करने हेतु यह बहुत ही उपयोगी होता है ।
६. अलसीके बीजोंको पीसकर एक चम्मचकी मात्रामें रातको सोनेसे पहले लें ! आपको इसे पानीके साथ लेना है ।
७. प्रातः २ चम्मच गुड रात्रिके बासी दूधको उष्ण कर लें !
८. दूधमें सूखे अंजीरको उबालकर खाएं और दूधको पी लें ।
९. प्रातः उठकर नींबूके रसमें काला ‘नमक’ मिलाकर सेवन करें !
१०. रातके भोजनमें पपीतेका सेवन करें !
११. एक गिलास ‘गर्म’ दूधमें दो चम्मच देसी घी डालकर सोनेसे पहले पिएं !
१२. फलोंमें द्राक्ष (अंगूर), पपीता, खुबानी, अंजीर, अनानास एवं नाशपतीका अधिक सेवन करें ! ये फल मलावरोधकी समस्यामें लाभदायक सिद्ध होते हैं ।
१३. ‘रेशेदार’ आहारका सेवन करें; क्योंकि ‘फाइबर’युक्त आहारकी कमी भी मलावरोधका एक मुख्य कारण है । प्रतिदिनके आहारमें २०-३० ग्रा. में ‘फाइबर’ होना आवश्यक है । यह भी ध्यान रखें कि अधिक मात्रामें ‘रेशे’का सेवन करनेसे ‘गैस’ तथा पेट फूलनेकी समस्या हो सकती है ।
१४. भोजन लेनेके उपरान्त वज्रासनमें बैठते हुए अपान हस्त मुद्रा लगाकर २० मिनिट बैठें !
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