स्वच्छताकी वृत्तिको करें आत्मसात
रोगमुक्त रहनेके लिए स्वच्छ जीवन और स्वस्थ रहना अत्यधिक आवश्यक है । स्वच्छता अपनानेसे व्यक्ति रोगमुक्त रहता है । ‘हैजा’, अतिसार (पेचिश), ‘टायफॉइड’ जैसे अनेक रोग स्वच्छताका ध्यान नहीं रखनेके कारण होते हैं; इसलिए प्रत्येक व्यक्तिको जीवनमें स्वच्छता अपनानी चाहिए । स्वच्छता और अच्छा स्वास्थ्य हमें रोगोंसे दूर रखते हैं । खानेसे पहले हाथ धोना चाहिए । रहन-सहन और संयमित आहार लें ! बाल और नखोंकी (नाखूनोंकी) नियमित स्वच्छता करें ! प्रतिदिन स्नानकर स्वच्छ वस्त्र पहनें, अपने घर व आसपासके परिसरको भी स्वच्छ रखें ! अन्य लोगोंको भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए । स्वच्छता पवित्रताके पूर्वका चरण है; इसलिए इसे अपने जीवनमें आत्मसात करें ! हमारी भारतीय संस्कृति सात्त्विक जीवन प्रणालीका प्रतिपादन करती है और इसमें स्वच्छताका तत्त्व ऐसे अन्तर्भूत है कि कोई मात्र वैदिक संस्कृति अनुसार आचरण करे तो उसमें यह गुण स्वतः ही आत्मसात हो जाएंगे । हमारे यहां प्रातःकाल उठकर स्नान ध्यानकी परम्परा है, जो स्वछताके तत्त्वको अंगीकृत करती है । हम अपने घरको भी मन्दिर समान पवित्र मानते हैं; इसलिए उसमें भी स्वच्छता करते रहते हैं ।
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