मन्दिर जलानेवाले ५० बन्दियोंको पाकिस्तानके हिन्दू समुदायने किया क्षमा, सभी बन्दी होंगे स्वतन्त्र 


१६ मार्च, २०२१
       पाकिस्तानमें १०० वर्ष पुराने एक मन्दिरको मुसलमानोंकी भीडने जलाकर ध्वस्त कर दिया था । आग लगाते हुए मुसलमानोंने अल्लाह-हू-अकबरके उद्घघोष किए । वीडियोमें आग लगानेसे उठते हुए धुएं और ‘बम’के धमाकोंकी ध्वनि सुनी जा सकती थी । परमहंस महाराजके इस विश्राम स्थलको १९४७ के विभाजनके पश्चात बन्द कर दिया गया था । खैबर पख्तूनके मुख्यमन्त्री महमूद खान और हिन्दू कॉउंसिलके रमेश कुमारके मध्य हुए ‘समझौते’में हिन्दुओंने उन्हें क्षमा कर दिया । अब उन ५० अपराधियोंको स्वतन्त्र कर दिया जाएगा । मुख्यमन्त्रीने इस घटनाकी निन्दा की और सर्वोच्च न्यायालयने ध्वस्त मन्दिरके पुनर्निर्माणका आदेश दिया । मौलानाओंने भी क्षमा मांगते हुए हिन्दुओंके समुदायको सुरक्षा प्रदान करनेका आश्वासन दिया है ।
       किसी भी प्रकारकी सुरक्षा प्रदान करनेसे पहले, पाकिस्तानमें जिहादियोंद्वारा मन्दिर तोड दिया जाता है अथवा वहांके अल्पसंख्यक समुदायके लोगोंको मार दिया जाता है या उनकी सम्पत्तियोंको अपने अधिकारमें ले लिया जाता है; उनसे नाटकीय ढंगसे पुनः क्षमा मांगी जाती है । जबतक पाकिस्तानको किसी समृद्ध देशसे अनुदान प्राप्त होता है तो वह भारतमें उपद्रव करानेकी धमकियां देता है । भूखे होनेपर वह इस प्रकारके मानवीय नाटक करनेवाला दिखाई देता है । ऐसे देशका नष्ट होना ही विश्वके लिए कल्याणकारी होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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