युवतियोंके अन्तर्वस्त्र चुरानेवाले मोहम्मद रोमिन व अस्साकके प्रकरणमें ‘तन्त्र-मन्त्र’ शब्दका प्रयोगकर ‘मीडिया’द्वारा हिन्दुओंको बनाया गया लक्ष्य
१६ मार्च, २०२१
हिन्दू विरोधी व वामपन्थी ‘मीडिया’द्वारा सदैव ही हिन्दुओंकी अपकीर्तिके लिए अनेक छद्म समाचार प्रसारित किए जाते रहते हैं । इसमें शब्दोंको बहुत ही चतुराईके साथ प्रस्तुत किया जाता है । जब भी कभी कोई मौलवी अपराध करता हुआ बन्दी बनाया जाता है तो आंग्ल भाषामें उसे ‘गॉडमैन’ लिखा जाता है; परन्तु प्रतीकात्मक चित्र किसी भगवाधारी बाबाका होता है । वही जब कोई ‘फकीर’ अपराध करता है तो उसे तान्त्रिक कहा जाता है और यदि अपराधी किसी मस्जिदमें छिप जाता है तो मस्जिदके स्थान पर धर्मस्थान कहकर सम्बोधित किया जाता है । अब मेरठमें ऐसे ही एक प्रकरण अन्तर्गत युवतियोंके अन्तर्वस्त्र चुरानेवाले जिहादियोंके प्रकरण प्रतिवेदनमें तन्त्र-मन्त्र शब्दका प्रयोग किया गया है । समाचारके अनुसार उत्तर प्रदेशके मेरठ जनपदमें कबाडी बाजार क्षेत्रमें कुछ युवक युवतियोंके अन्तर्वस्त्र चुराते हुए ‘सीसीटीवी’में दिखाएं दे रहे थे, जिसके पश्चात आरोपियोंमेंसे एक महोम्मद रोमिनको बन्दी बनाया गया है व दूसरा आरोपी मोहम्मद अस्साक भाग निकला है । ‘सीसीटीवी कैमरे’मैं स्पष्ट रूपसे दिखाई दे रहा है कि आरोपी ‘स्कूटी’से आकर बाहर सुख रहे युवतियोंके अन्तर्वस्त्र चुरा रहे हैं एवं उनमेंसे एक मस्जिदमें चला जाता है । अब मस्जिदमें किस प्रकारका तन्त्र-मन्त्र होता है, इस विषयसे सभी अनभिज्ञ हैं; परन्तु ‘मीडिया’ने अपने समाचारमें इस शब्द का प्रयोग बडी ही चतुराईसे किया है ।
जहां आजतकने लिखा है कि क्षेत्रके लोगोंने आशंका जताई है कि यह तन्त्र-मन्त्रका भाग हो सकता है तो वही हिन्दुस्तानने लिखा है कि आशंका जताई जाती है कि युवतियोंके वस्त्रोंका प्रयोग वशीकरण व तन्त्र-मन्त्र क्रियामें हो सकता है । ऐसे ही एक अन्य समाचार पत्र अमर उजालाने लिखा है कि व्यापारियोंको अन्देशा है कि दूसरे समुदायके युवक तन्त्र-मन्त्र क्रिया करनेके लिए परिधानोंकी चोरी करते हैं । अब प्रश्न यह है कि क्या ‘मीडिया’ नमाज पढनेको वेद पाठ कह सकता है ? यदि नहीं तो भला ‘फकीर’द्वारा किए जानेवाले जादू टोनेकी प्रक्रिया हिन्दूधर्मसे सम्बन्धित कैसे हो सकती है ? इसका अर्थ स्पष्ट है कि पढनेवाले पाठकको यह लगे कि यह कृत्य हिन्दुओंने किए हैं । उल्लेखनीय है कि मेरठके जिस व्यापारीके घर यह चोरी हुई वहां पूर्वमें भी इस प्रकारके प्रकरण घटित हो चुके हैं ।
समाचार स्पष्ट करता है कि किस प्रकार ‘मीडिया’का एक विशेष वर्ग हिन्दुओंकी छविको धूमिल करने हेतु प्रयासरत है । अब सभी हिन्दुओंको संगठित होकर ऐसे छद्म समाचार प्रसारित करनेवाले ‘मीडिया’का पूर्णतः बहिष्कार करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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