उत्तरी मोजाम्बिकके मार्ग शीश कटे शवोंसे पटे, सैनिकों तथा ईसाइयोंपर आतङ्की आक्रमण, ४.३७ लाख करोडके प्राकृतिक ‘गैस’ भण्डार युक्त क्षेत्रमें विनाश
३१ मार्च, २०२१
दक्षिण-पूर्वी अफ्रीकामें स्थित मोजाम्बिकके उत्तरी भागमें पाल्मा नामक पत्तनपर (पोर्टपर) आतङ्की आक्रमणमें ५५ लोग मृत हुए हैं । पाल्मा प्रकृतिक ‘गैस’ सम्पन्न क्षेत्रमें मार्ग शीश कटे शवोंसे पट गए थे, जबकि शासनने आधिकारिक मृत्युकी सङ्ख्या मात्र ७ बताई है । ‘आईएसआईएस’ने इस आक्रमणकी ‘जिम्मेदारी’ ली है ।
इस क्षेत्रमें ६० बिलियन डॉलर्सका (४.३७ लाख करोड रुपयों) प्राकृतिक ‘गैस’ भण्डार होनेके कारण वहां अनेक विदेशी प्रतिष्ठान कार्यरत हैं । फ्रांसकी ‘एनर्जी कम्पनी टोटल’ वहां सक्रिय है । आतङ्कियोंने जिनकी हत्या की है, वे सभी सुरक्षाकर्मी अथवा ईसाई सम्प्रदायके हैं । सहस्रों लोगोंने लगभग ५० किलोमीटर पैदल भागकर अपनी प्राणरक्षा की । अभी भी ६० लोग ‘लापता’ हैं तथा निकटवर्ती वनोंमें आतङ्की छुपे होनेकी आशङ्का है ।
सभी आतङ्की पुलिस अथवा सैनिकोंके गणवेशमें आए थे तथा इन्होंने सेना, पुलिस तथा शासकीय भवनोंपर आक्रमण किया । दो ‘बैंक’को लूट लिया गया । इस क्षेत्रमें घटित होनेवाले आतङ्की आक्रमणोंमें अभीतक ३ वर्षोंमें २६०० मृत तथा ६.७ लाख विस्थापित हुए हैं । इनके पीछे ‘आईएसआईएस’से सम्बन्धित संस्था ‘अहलुस-सुन्नाह-वल-जमाह’का हाथ है ।
अमरूला नामक ‘होटल’में २०० से अधिक श्रमिक फंसे थे, जिनपर गोलियां चलाई जा रही थीं । नवम्बर २०२० में आतङ्कियोंने ५० से अधिक लोगोंके शीश काट दिए थे ।
यह एक मुसलमान बहुल निर्धन क्षेत्र है; अतः यहां आतङ्की सक्रिय हैं । अफ्रीकी ईसाई युवतियोंके अपहरण, यौन शोषण, बलपूर्वक निकाह, धर्मान्तरण आदि समाचार इन देशोंसे नित्य आते हैं । यहां ईसाइयोंका जीवन दूभर है । जबतक विश्वके सभी शक्तिशाली देश एकजुट होकर आतङ्कियोंका सर्वनाश करने हेतु अग्रसर नहीं होते; यह नरसंहार ऐसे ही होता रहेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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