झारखंडका एक जनपद ऐसा भी, जहां ‘ऑक्सीजन सिलेंडरकी व्यवस्था करनेके स्थानपर बनवाई जा रही है अर्थी
२० अप्रैल, २०२१
गोड्डामें प्रत्येक दिवस ‘कोरोना’से मृत्यु हो रही है; परन्तु ‘ऑक्सीजन सिलेंडरकी व्यवस्था करानेके स्थानपर प्रशासन अर्थी बनवा रहा है ! प्रशासनके निर्देशपर नगरपरिषदके द्वारा शव ढोनेके लिये अधिक संख्यामें बांसकी अर्थी बनानेका आदेश दिया गया है । इसको लेकर नगर परिषदके हटिया परिसरमें रह रहे मोहली परिवार दिन-रात आदेश पूर्ण करनेमें लगे हैं । तत्क्षण प्रायः २०० अर्थियां बनानेका आदेश दिया गया है ।
अधिक संख्यामें बन रहे शव ढोनेकी अर्थियोंको लेकर लोगोंमें भयका वातावरण है । प्रत्येक दिवस तीनसे चारकी संख्यामें मृत्यु हो रही है । यद्यपि लोगोंने क्रोध प्रकट करते हुए इसका उत्तरदायी शासन एवं जनपद प्रशासनको बताया है । लोगोंका कहना है कि एक वर्षका समय मिला था, मात्र प्राणवायुकी अल्पता होनेसे लोगोंकी मृत्यु हो रही है । यदि शव ढोनेकी सामग्रीके अतिरिक्त प्राणवायु आदिकी व्यवस्थाकी जाती है तो लोगोंको यह परिस्थिति देखना नहीं पडती ।
यह सत्य है कि जीवन और मृत्यु किसीके हाथ नहीं है; परन्तु अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनेके चलते शासन और प्रशासनको मतकी चिन्ता अधिक है, मतदाताकी नहीं; परन्तु लोगोंको भी अब शासन-प्रशासनपर आश्रित न होकर स्वयंसे उपाय यथाशीघ्र आरम्भ कर देने चाहिए । आयुर्वेदमें प्रत्येक रोगका उपचार सर्वसुलभ उपलब्धताके आधारपर बताया गया है; अतः हिन्दुओं अन्तिम अवसर है, अपनी संस्कृतिकी ओर समय रहते पुनः लौटें और साधना करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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