‘हिन्दू त्योहार ‘पाप’, हमारी गलियोंसे नहीं निकलने देंगे धार्मिक यात्रा : मुसलमान बहुल क्षेत्रकी जनयाचिका, मद्रास उच्चन्यायालयकी असहमति 


०९ मई, २०२१
          तमिलनाडुके पेरम्बलूर जनपदका वी कलाथुर क्षेत्र मुसलमान बहुल है । यहां हिन्दू अल्पसङ्ख्यक हैं ।  इस क्षेत्रका बहुसङ्ख्यक समाज हिन्दू मन्दिरोंसे निकलनेवाली धार्मिक यात्राओंका वर्ष २०१२ से विरोध करता आ रहा है । इसी कारण हिन्दुओंने ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों व पथ सङ्चलनके समय पुलिससे सुरक्षाकी याचना की थी । सुरक्षा कर्मियोंने कुछ प्रतिबन्ध लगाते हुए यह याचना स्वीकार की थी ।
मुसलमान पक्षद्वारा मद्रास उच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की गई थी कि उनके क्षेत्रोंसे ऐसी धार्मिक यात्राएं न निकाली जाए; क्योंकि ये इस्लामके अनुसार पाप (हराम) हैं  । इसपर मद्रास उच्चन्यायालयके किरुबकर्ण और पी वेलमुरुगनकी २ सदस्यीय पीठने हिन्दुओंके पक्षमें निर्णय दिया । न्यायालयने कहा कि मात्र इसलिए कि वह किसी धर्मविशेष बहुल क्षेत्र है, दूसरे धर्मके आयोजनों, धर्मयात्राओंको उस मार्गपर प्रतिबन्धित नहीं किया जा सकता । न्यायालयने तर्क दिया कि ऐसी याचिकाएं स्वीकार की गईं, तो कोई भी अल्पसंङ्ख्यक समुदाय देशके अधिकतर भागोंमें अपने त्योहार अथवा धार्मिक आयोजन नहीं कर सकेगा । इस प्रकारका विरोध उत्पात, परस्पर वैमनस्य तथा हिंसाको आमन्त्रण देगा ।
     न्यायालयका निर्णय उचित है । लोकतन्त्रमें सभीको अपने-अपने धर्म पालनका अधिकार है । जिस क्षेत्रमें मुसलमान बहुसङ्ख्यक हो जाते हैं, वे अपनी छद्म धर्मनिरपेक्षता त्यागकर कट्टरपन्थी हो जाते हैं, यही इनका मूल चरित्र है । यदि हिन्दुओंकी यात्रा इनके लिए ‘पाप’ है तो हिन्दुओंके देशमें रहना, इन लोगोंके लिए पुण्य कैसे हो सकता है ? सभी धर्मान्ध विचार करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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