झारखंड उच्च न्यायालयने ‘पुलिस’पर लगाया चिकित्सकोंसे अपने मनानुसार उत्तर निकलवानेका आरोप
०५ अगस्त, २०२१
धनबादके जनपद एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंदकी हत्याके प्रकरणमें राज्य पुलिसकी जांचपर प्रश्न चिह्न लग गया है । झारखंड न्यायालयने इस प्रकरणमें ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’पर साक्ष्योंके साथ खिलवाड करनेका आरोप लगाया है । झारखंडके धनबाद जनपदमें ४९ वर्षीय न्यायाधीश उत्तम आनंदकी २८ जुलाईके प्रातः ५:०० बजे कथित रूपसे हत्या कर दी गई थी । ‘सीसीटीवी फुटेज’में यह स्पष्ट रूपसे देखा जा सकता है कि ‘ऑटो’ने उन्हें जानबूझकर टक्कर मारी थी । इस प्रकरणमें ‘पुलिस’द्वारा २ लोगोंको बन्दी भी बनाया गया था । अब ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’पर पूछताछमें साक्ष्योंके साथ छेडछाडके आरोप लग रहे हैं । न्यायालयने ‘ऑटोप्सी’के प्रतिवेदनमें मृत्युका कारण किसी ठोस वस्तुसे वार करके मस्तिष्कपर चोट लगना बताया जा रहा है । झारखंड उच्च न्यायालयने ‘पुलिस’पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जानबूझकर चिकित्सकोंसे ऐसे प्रश्न पूछ रहे हैं, जिससे उन्हें अपने मन अनुसार उत्तर मिल सके । वहीं अब न्यायालयने इस पूरे प्रकरणको षड्यन्त्रका नाम भी दिया गया है; क्योंकि ‘ऑटो’का निर्जन मार्गपर इस प्रकारसे मुडना व मृतकसे टकराना षड्यन्त्र अन्तर्गत ही दृष्टिगत होता है । न्यायालयने यह भी कहा कि समय बहुत मूल्यवान है, यदि प्रकरणकी जांचमें विलम्ब हुआ तो जांचपर भी विपरीत व नकारात्मक प्रभाव पडेगा । उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश उत्तम आनंद क्षेत्रके किसी ‘हाई प्रोफाइल’ हत्याके प्रकरणकी सुनवाई भी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कुछ व्यक्तियोंकी प्रतिभूतिको निरस्त कर दिया था ।
भारतके कथित प्रजातन्त्रमें भ्रष्टाचार चारों ओर व्याप्त है । यदि इस प्रकरणमें भ्रष्टाचारकेद्वारा साक्ष्योंको परिवर्तित कर भी दिया गया हो, तो इसमें कुछ भी अचम्भित होनेकी बात नहीं होगी । अब हिन्दूराष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात ही न्याय व्यवस्था राष्ट्रमें पूर्णतः सक्षम होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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