‘आईएसआईएस’में जुडने हेतु केरलसे भागे नागरिकोंको ‘तालिबान’ने बन्दीगृहसे किया मुक्त


१९ अगस्त, २०२१
         ‘एनबीसी न्यूज’के प्रवक्ता रिचर्ड एंजेलने रविवार, १५ अगस्तको एक दृश्यपट साझा किया, जिसमें ‘तालिबान’द्वारा काबुल बन्दीगृहसे मुक्त किए गए बन्दी दृष्टिगत हो रहे हैं । इसमें केरलकी निमिषा फातिमा भी सम्मिलित है, जो ‘इस्लामिक स्टेट’के लिए भारत छोडकर चली गई थी । वहीं ‘मातृभूमि’के एक प्रतिवेदनकी गुप्त जानकारीके अनुसार ‘तालिबान’द्वारा मुक्त किए गए बन्दियोंमें आठ केरलके ही निवासी हैं, जो ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित होने के उद्देश्यसे अफगानिस्तान गए थे तथा इन सभीको अफगानी सेनाने बन्दी बनाया था । प्रतिवेदनमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब यह कट्टरपन्थी किसी अन्य रूपसे भारत आ सकते हैं । ऐसेमें बन्दरगाह और सीमापर चौकसीमें वृद्धि कर दी गई है । ज्ञात हो कि जब फातिमाने २०१६ में ‘इस्लामिक स्टेट’में सम्मिलित होने हेतु भारत छोडा था, तब उसका ‘शौहर’ सङ्घर्षके मध्य मारा गया था; जबकि फातिमाको अफगानी सेनाने बन्दी बनाया था । फातिमाकी मांने केन्द्र शासनसे उसकी पुत्रीको ‘वापस’ लाने हेतु आग्रह किया था; परन्तु केन्द्र शासनने राष्ट्रीय सुरक्षाका सन्दर्भ देते हुए इसे अस्वीकृत कर दिया था । उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तानके सत्तामें आनेके पश्चात ‘तालिबान’द्वारा विभिन्न कारागारोंमें बन्द २३०० कुख्यात आतङ्कियोंको मुक्त किए जानेका समाचार प्रसारित हुआ था; परन्तु वहीं मातृभूमिके प्रतिवेदनके अनुसार काबुलके बादाम बाग और पुल-ए-चरखी बन्दीगृहसे मुक्त किए गए आतङ्कियोंऔर बन्दियोंकी सङ्ख्या ५००० से भी अधिक है ।
       राष्ट्र विरोधी शक्तियां भारतके चारों ओर सदृढ हो रही हैं । भारतीय सेनाकी सजगता एवं केन्द्रके कठोर निर्णय इसको सुरक्षा प्रदान करने हेतु अब अनिवार्य हैं; अतः केन्द्र शासन ऐसे प्रकरणोंको लेकर सतर्क रहे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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