मुख्यमन्त्री योगीकी चेतावनीका प्रभाव, कैराना ‘दौरे’के अगले ही दिन ‘कुख्यात’ फुरकानने किया आत्मसमर्पण (सरेंडर)
१० नवम्बर, २०२१
उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने ८ नवम्बर २०२१ को शामलीके कैरानाका ‘दौरा’ किया था । यहां विकास परियोजनाओंका लोकार्पण और शिलान्यास करनेके साथ ही खुले मंचसे उन्होंने कठोर शैलीमें उपद्रवियोंको चेताया था । इसका प्रभाव भी दिखने लगा है । उनके ‘दौरे’के अगले ही दिन ‘कैरानाका खौफ’ कहे जानेवाले ‘कुख्यात बदमाश’ फुरकानने अपनी प्रतिभूति (जमानत) तुडवाकर न्यायालयमें आत्मसमर्पण कर दिया ।
फुरकानपर लूट, हत्या, ‘रंगदारी’के लगभग डेढ दर्जनसे अधिक अभियोग (मुकदमे) प्रविष्ट हैं । प्रतिवेदनोंके अनुसार, अगस्त २०१४ में ‘दिनदहाडे’ स्थानीय व्यापार मण्डलके कोषाध्यक्ष विनोद सिंघलकी हत्या कर दी गई थी । हत्याका आरोप फुरकानपर लगा था । इस हत्याके पश्चात, उसे ‘कैरानाका खौफ’ कहा जाने लगा । २०१७ में ‘पुलिस’ने उसे बन्दी बनाकर कारावास भेज दिया था; किन्तु वह प्रतिभूतिपर छूटकर कारावाससे बाहर आ गया था । बताया जाता है कि कारावाससे निकलनेके पश्चात, उसने पुनः व्यापारियोंसे ‘रंगदारी’ मांगना आरम्भ कर दी थी । उसपर ५० सहस्र रुपएका पुरस्कार भी घोषित था ।
बता दें कि मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने सोमवारको (८ नवम्बर २०२१) पश्चिमी उत्तर प्रदेशके कैरानामें जनसभाको सम्बोधित करते हुए अपराधियोंको कठोर चेतावनी देते हुए कहा था कि जो हमारी बहन-बेटियोंकी प्रतिष्ठाके साथ खिलवाड करेगा, उसकी पीढियां ‘भूल’ जाएंगी कैसे उपद्रव होता है ?
मुख्यमन्त्री योगीजी जैसे नेताओंकी आज देशको अत्यन्त आवश्यकता है । सभी राजनेता उनसे प्रेरणा लें और उनका अनुकरण करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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