नग्न ‘वीडियो कॉल’कर साध्वी प्रज्ञाको फंसानेका प्रयास, राजस्थानसे पकडे गए रवीन और वरिस, कम पढे-लिखे, किन्तु ‘साइबर’ अपराधमें प्रवीण


१५ फरवरी, २०२२
मध्य प्रदेशकी राजधानी भोपालसे सांसद ‘भाजपा’ नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुरको भयादोहन करनेका प्रयास करनेवाले दो आरोपितोंको राजस्थानके भरतपुरसे बन्दी बनाया गया है । इन दोनों युवकोंने ‘भाजपा’ सांसदको ‘सेक्सटॉरशन’के जालमें फंसाकर उगाहीका षड्यन्त्र रचा था । मध्य प्रदेश ‘पुलिस’ने भरतपुरके सिकरीमें छापेमारी करके इन्हें दबोचनेमें सफलता पाई । दोनों सगे भाई हैं । उन्हें पारगमन अभिरक्षापर भोपाल लाया गया है । राजस्थानमें अभीके दिनोंमें अपराधके कई प्रकरण देखनेको मिले हैं ।
भरतपुरके ‘पुलिस’ महानिरीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसराके अनुसार, ये प्रकरण ‘साइबर’ अपराधका था और दोनों को बन्दी बनाकरके म.प्र. ‘पुलिस’को सौंप दिया गया है । भोपालके टीटी नगरमें एक सप्ताहसे भी पूर्व इस प्रकरणमें प्राथमिकी प्रविष्ट कराई गई । २३ वर्षीय रवीन और २१ वर्षीय वरिस वर्षोंसे ठगीके ‘धंधे’में लिप्त हैं । दोनोंने भले ही पढाई ठीक से न की हो; किन्तु ‘साइबर’ अपराध करते रहे हैं । उन्हें ठगी करते समय इसका अभिज्ञान नहीं था कि किसके साथ वह इस प्रकारकी चाल चल रहे हैं ।
ये दोनों गांवमें खेती-बाडी भी करते हैं । ये घटना ६ फरवरी २०२२ की है, जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुरके चलभाषपर एक ‘वीडियो कॉल’ आया । उससे पहले उन्हें ‘व्हाट्सऐप्प’पर सन्देश आया था, ‘हैलो’, मुझे आपसे बात करनी है । इसपर सांसदने समझा कि ये उनके क्षेत्रकी कोई युवती है और किसी समस्यापर बात करना चाहती है । उन्होंने उसे बेटा कहकर सम्बोधित किया और अपना पूरा परिचय लिखकर भेजनेको कहा; किन्तु, उधरसे ‘वीडियो कॉल’ आ गया और युवती अपने वस्त्र उतारने लगी ।
सांसदने शीघ्रतामें ‘वीडियो कॉल’ काटकर उस ‘नम्बर’को प्रतिबन्धित किया । इसके पश्चात उन्हें दूसरे ‘नम्बर’से एक छायाचित्र भेजी गई । उस छायाचित्रमें उस ‘वीडियो कॉल’का ‘स्क्रीनशॉट’ था । धमकी दी गई कि इसे सामाजिक जालस्थलपर ‘वायरल’ कर दिया जाएगा । रात्रिके ढाई बजेतक उन्हें ‘फोन कॉल’ आते रहे; किन्तु उन्होंने इसे उठाया नहीं । ७ फरवरीको प्रकरण प्रविष्ट कराए जानेके पश्चात उन ‘नम्बरों’को भोपाल ‘पुलिस’ने खोज लिया । उनकी हलचलकी जानकारी मिलते ही ‘पुलिस’ सतर्क हो गई ।
       धर्मान्ध जिहादी अब सामान्यजनके साथ सन्तों और सांसदोंको भी लक्ष्य बना रहे हैं, जो इनके  दुस्साहसको दर्शाता है । इन्हें कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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