‘चारमीनार’के निकट भाग्यलक्ष्मी मन्दिर नहीं, काशी विश्वनाथको औरंगजेबने तोडा-लूटा भी नहीं : कांग्रेसने दिखाई हिन्दू-घृणाकी राजनीति
१५ मई, २०२२
उत्तर प्रदेशमें वाराणसीके ज्ञानवापी विवादित ढांचेके सर्वेक्षण एवं ‘वीडियोग्राफी’के मध्य कांग्रेसने शनिवारको (१४ मई २०२२ को) काशी विश्वनाथ मन्दिरके विध्वंसके लिए मुगल आक्रान्ता औरंगजेबको ‘क्लीनचिट’ देनेका प्रयासके मध्य विवाद खडा कर दिया ।
ज्ञानवापी विवादित ढांचेकी ‘वीडियोग्राफी’ और सर्वेक्षणके मध्य लोकप्रिय ‘ट्विटर हैंडल’ने (@IndiaHistorypic)१२ मईको ‘ट्विटर’पर काशी विश्वनाथ मन्दिरकी क्षतिग्रस्त भीतका एक पुरातन चित्र ‘अपलोड’ किया था । चित्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणके (ASI के) अभिलेखागारसे लिया गया था ।
चित्र देखने और उसके शीर्षकमें औरंगजेबको अत्याचारी बतानेपर कांग्रेस मुगल आक्रान्ताके बचावमें आ गई । महाराष्ट्र कांग्रेस सेवादलने कहा, “औरंगजेबकी मृत्यु ३ मार्च १७०७ को हुई थी । १८९० में खींचा गया एक चित्र उस भीतको कैसे दिखा सकता है, जिसे १७०७ में मरनेवाले व्यक्तिद्वारा कथित रूपसे तोडा गया था ?”
सेवादलने कहा कि यह प्रमाणित करनेके लिए कि ज्ञानवापी ‘मस्जिद’ काशी विश्वनाथ मन्दिरको तोडकर बनाई गई थी, उन्हें पूर्वके और पश्चातके चित्रोंको देखनेकी आवश्यकता है, जो पृथक-पृथक समयमें पृथक-पृथक स्थानोंको दर्शाते हैं । उदाहरणके रूपमें, उन्होंने हैदराबादमें ‘चारमीनार’के दो चित्र पृथक-पृथक ‘पोस्ट’ किए । दूसरे रंगीन चित्रमें ‘चारमीनार’के निकटमें स्थित भाग्यलक्ष्मी मन्दिर दिखाई दे रहा है, जबकि प्रथम ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ चित्रमें मन्दिर नहीं है । मन्दिरका निर्माण १९६० के दशकमें किया गया था और यह एक विवादित संरचना है, जिसके विस्तारको तेलंगाना उच्च न्यायालयने रोक दिया है ।
कांग्रेसद्वारा औरंगजेबका बचाव करना उचित ही है; क्योंकि इनकी राजनीति मुगल आतताइयोंसे ही तो चलती आई है; किन्तु अब कांग्रेस कितना ही प्रयास कर ले, हिन्दू अब जाग्रत हो रहा है और अपने सभी पुरातन मन्दिर लेकर रहेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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