असम पुलिसकी अभिरक्षामें सफीकुल इस्लामकी मृत्युके उपरान्त जिहादियोंकी ‘भीड’ने ‘थाने’में लगाई आग, ३ बन्दी


२४ मई, २०२२
       असममें ‘पुलिस’ अभिरक्षामें एक व्यक्तिकी मृत्युके उपरान्त ‘भीड’ने नगांव जनपदमें बटाद्रवा ‘पुलिस थाने’में आग लगा दी । बता दें बटाद्रबा ‘थाना’में शनिवारको उग्र धर्मान्धोंकी ‘भीड’ने तोडफोडकर उसमें आग लगा दी । जिसके उपरान्त ‘थाना’ समूचे रूपसे जलकर ‘खाक’ हो गया है और कुछ वाहन भी समूचे जल गए । ‘एएनआई’के अनुसार, ‘एसपी’ लीना डोलेने इस प्रकरणपर कहा, हम आरोपोंकी जांच कर रहे हैं । ‘थाने‘पर आक्रमण करनेवालोंमेंसे ३ को अभिरक्षामें लिया गया है । आक्रमणमें २ ‘पुलिसकर्मी’ चोटिल हुए हैं ।
       वहीं, इस प्रकरणपर असम ‘डीजीपी’ भास्कर ज्योति महंतने कहा, “हम सफीकुल इस्लामकी मृत्युको बहुत गम्भीरतासे लेते हैं और बटाद्रबा थानाध्यक्षके ओसीको निलम्बित कर दिया है । यदि हमारी ओरसे कोई त्रुटि हुई है तो हमें उसका समाधान निकालनेकी आवश्यकता है और दोषियोंको ढूंढकर विधानके अनुसार दण्डित किया जाना चाहिए । मिली सूचनाके अनुसार, बटाद्रवा ‘पुलिस थाने’की ‘पुलिस’ने सफीकुल इस्लाम नामक व्यक्तिको सालनाबारी क्षेत्रसे अभिरक्षामें लिया था । सफीकुल इस्लामको रात्रिमें मादकताकी स्थितिमें सडकपर देखा गया । जिसके उपरान्त उसे ‘थाने’ लाया गया और कथित वक्तव्यके अनुसार, १० सहस्र रुपयेकी उत्कोच (घूस) मांगी थी । वहीं ‘भीड’में सम्मिलित लोगोंने आरोप लगाया है कि ‘घूस’की राशि देनेमें असमर्थ होनेके कारण ‘पुलिस’ने मछली विक्रय करनेवाले सफीकुल इस्लामकी हत्या कर दी ।
       इसपर कार्यवाही करते हुए जनपद प्रशासनने रविवारको आगकी घटनामें कथित रूपसे सम्मिलित पांच परिवारोंके घरोंको ध्वस्त कर दिया । भवनोंको गिरानेके लिए ‘जेसीबी मशीन’ लाई गई थी ।
 
      जिस क्षेत्रमें जिहादी बहुसंख्यक होते हैं, वहां तो अब ‘पुलिस’ और ‘पुलिसथाने’ भी सुरक्षित नहीं है तो सोचकरकर देखिए कि सामान्य व्यक्ति कैसे सुरक्षित रह पाएंगे ? पहले तो बांग्लादेशी और रोहिंग्या अवैध घुसपैठ करते हैं, जिसमें स्थानीय मुसलमान उनकी सहायता करते हैं । तत्पश्चात हिन्दुओंके जीवनमें संकटका कारण बनते हैं । आवश्यकता है इन घुसपैठियोंको अविलम्ब देशसे बाहर किया जाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
सौजन्यसे : https://www.hindujagruti.org


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