प्रत्येक गृहस्थने साधनाको अपनी दिनचर्याका अविभाज्य अंग बनाना चाहिए तभी जीवनमें सुख, शांति, समृद्धि सहजतासे प्राप्त होती है और वृद्धावस्थाका आनंदपूर्वक व्यतीत होना सम्भव है। नामजप करना, सत्संगमें जाना, धर्मग्रंथोका अभ्यास करना या सन्त लिखित वाणीको पढना उसे आत्मसात करने हेतु मनन-चितन करना, धर्मकार्य हेतु यथाशक्ति तन, मन, धन, बुद्धि, कौशल्य अर्पण करना, यह सब साधनाके कुछ सरल उपाय हैं, जिससे अंतर्मुखता और ईश्वरके प्रति निष्ठामें उत्तरोत्तर वृद्धि होती है – तनुजा ठाकुर
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