प्रतिदिन अपने कर्मोंकी अवश्य करें समीक्षा


प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः
किं नु मे पशुभिस्तुल्यं किं नु सत्पुरुषैरिति  – सुभाषितरत्नभाण्डागार

अर्थ : प्रतिदिन व्यक्तिने अपने कर्मोंकी समीक्षा अवश्य करनी चाहिए कि उसकी सर्व कृति सत्पुरुषके समान है या पशु समान !



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