मनोनीत नामजप करनेसे उसमें न्यून-अधिक मात्रामें अहंभाव होता ही है; परंतु गुरुद्वारा दिया गया नाम जपनेमें अहंभाव नहीं होता । साथ ही उस नाममें चैतन्य होता हैः अतः प्रगति शीघ्र होती है । – परम पूज्य भक्तराज महाराज
(संदर्भ : सनातनका मराठी प्रकाशन ‘संत भक्तराज महाराज यांची शिकवण’)
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