
कुछ पंथोंके संस्थापक मूर्तिपूजाके विरोधक थे और आज उन पंथोंके अनुयायियोंद्वारा विश्वमें सर्वाधिक प्रमाणमें बनाई हुई अत्यधिक ऊंची मूर्तियां आप सर्वत्र देख सकते हैं ! बेचारे अनुयायी अपने गुरुकी निर्गुण तत्त्वज्ञानकी जग हंसाई करवा रहे हैं ! ध्यान रहे बिना ईश्वरके सगुण रूपके प्रति प्रेम और समर्पणके, उनके निर्गुण स्वरूपकी प्राप्ति असंभव है । चलिये अच्छा है, जब तक वे जीवित थे तो मूर्तिपूजाके विरोधक रहे, निर्वाणके पश्चात ऊपरसे अपनी पूजा होते देख उन्हें सगुण साधनाका महत्व समझमें आ गया होगा ! ऐसे धर्म संस्थापकोंको सचमें निर्वाण मिला होगा क्या जरा सोचें ! – तनुजा ठाकुर
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