दि २७. ९. २०१३ सरसंघचालक मोहन भागवतजीने कहा संघके ७ लक्ष १० सहस्र
७३ स्वयंसेवक स्वयंसेवक हैं। यह संख्या पर्याप्त है। इससे उनका ध्येय कितना संकुचित है यह
भान होता है।
उन्होंने निम्न सुत्र ध्यानमें रखे होते तो वे कदापि ऐसा न कहते।
१. हमारे पूर्वजोंने ‘कृण्वंतो विश्वंक आर्यम् अर्थात विश्वमे सभीको
आर्य (अर्थात सुसंस्कृत ) करेंगे ऐसी घोषणाकी।
२. मुसलमान कहतेहैं सभी मानवोंको मुसलमान बनाएंगे।
३. ईसाई कहते हैं सभी मानवोंको ईसाई बनाएंगे।
– परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (१२.१०.२००९)
Leave a Reply