समस्याओंका मूल कारण धर्मग्लानि है और उपाय मात्र धर्म संस्थापना है ! मेरे कुछ परिचित कहते हैं कि बेरोजगारी दूर करनेके लिए हमारे साथ मिलकर कार्य कीजिये, तो कुछ कहते हैं अशिक्षा दूर करने हेतु मेरे संग प्रयास कीजिये, तो कुछ कहते कन्या भ्रूण हत्या दूर करने हेतु हमारे संग जुडें, तो कुछ कहते हैं आप जन्मसे ब्राहमण हैं; अतः ब्राह्मण समाजके उत्थान हेतु कुछ विशेष करें तो भ्रष्टाचार दूर करने हेतु हमारा साथ दें ऐसा कहते हैं; परन्तु हमारे श्रीगुरुने इस सन्दर्भमें अत्यंत सुन्दर दृष्टिकोण हमें सिखाया है कि सारी समस्याओंका मूल कारण है व्यष्टि (अर्थात वैयक्तिक) और समष्टि (सामाजिक) स्तरपर धर्माचरणका अभाव ! एक बार धर्मकी संस्थापना हो जाए स्वतः ही सारी समस्याओंका निराकरण स्वतः ही हो जायेगा, आज बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, आतंकवाद और भ्रष्टाचारको रोकने हेतु अनेक कानून बने हैं; परन्तु समाजमें ये सारी समस्याओंमें कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है अपितु प्रत्येक क्षेत्रमें दिन-प्रति-दिन व्यभिचार बढ रहा है; इसीलिए मूल कारणको नष्ट करना आवश्यक है वह मात्र और मात्र धर्म संस्थापनासे ही सम्भव है ! -तनुजा ठाकुर
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