अ. वर्तमान कालमें नामजप योग्य साधना है क्योंकि कलियुगमें कर्मकांड हेतु अनेक बार सात्त्विक सामग्री नहीं मिल पाती है। जैसे पूजा हेतु मात्र देसी गायके घीका ही उपयोग होना चाहिए विदेशी गायके घीसे या भैंसके घीका दीप जलानेसे आसुरी शक्तियां आकृष्ट होती हैं इसलिए वर्तमान कालमें पूजाका यथोचित लाभ नहीं मिलता, यह तो मात्र मैंने एक सामग्रीका उदहारण बताया है। कर्मकांडका सिद्धांत जान लें, इस साधनामें पूजन सामग्रीका सात्त्विक होना, मन्त्रोंके योग्य प्रकारसे उच्चारण होना तथा शरीर, स्थानका पवित्र होना एवं कर्मकांडके नियमोंका शास्त्रानुसार कठोरतासे पालन होना अति आवश्यक है, इनमेंसे एक भी घटक यदि पालन न हो तो कर्मकांडका यथोचित लाभ नहीं मिलता। हमारे द्रष्टा ऋषि-मुनियों, संत-गुरुओंको यह ज्ञात था कि कलियुगमें पंचोपचार पूजन हेतु सात्त्विक सामग्रीका भी उपलब्ध होना कठिन होगा अतएव उन्होंने नामजपको ही कलियुगकी मुख्य साधना बताई है तथापि हमारे पास जो उपलब्ध है, उससे देवताका यथासंभव पंचोपचार(धूप, दीप, गन्ध, पुष्प एवं नैवेद्यसे) पूजन भावपूर्वक कर, अपनी कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। जैसे देसी गायका घी उपलब्ध न हो तो तिलके तेलके दीपसे पूजन और आरती करें। तत्पश्चात् नामजप करें, गृहस्थने कमसे कम पूजा करते समय ११ माला अपने कुलदेवताका या इष्टदेवताका या अपने गुरुमंत्रका एवं ९ माला श्रीगुरु देव दत्तका जप अवश्य करना चाहिए। एवं धीरे-धीरे इस नामजपको बढानेका प्रयास करना चाहिए। वर्तमान कालमें १०० प्रतिशत घरोंमें पितृदोष है अतः दत्तात्रेय देवताका जप सभी गृहस्थोंने कष्टकी तीव्रता अनुसार दो से छह घंटे एवं शेष समय अपने कुलदेवताका या इष्टदेवताका या अपने गुरुमंत्रका जप करना चाहिए अर्थात् अपने गृहस्थ जीवनको सुखी रखने हेतु कमसे कम प्रतिदिन दो घंटे बैठकर जप अवश्य करना चाहिए। इसमें एक घंटे दत्तका एवं एक घंटे कुलदेवताका(इष्टदेवता या गुरुमंत्रका) जप करना चाहिए। इस जपको सवेरे एवं संध्या समय, आरती करते समय, घरके सर्व सदस्य नियमित बैठकर करनेका प्रयास करना चाहिए। इससे साधनाका संस्कार सभीमें अंकित होगा। जो साधक किसी गुरु या संतसे जुडकर प्रतिदिन तीनसे चार घंटे सेवा करते हों वे भी एक घंटे नियमित जप करें। समष्टि सेवा निर्विघ्न होने हेतु व्यष्टि जपका होना नितान्त आवश्यक है।
आ. आरम्भिक अवस्थामें किसी संतकी वाणीमें जप चलाकर, उसके साथ बोलकर या लिखकर जप करें, तत्पश्चात् उसे मनमें करनेका प्रयास करें। इसके उपरांत उसे सम्पूर्ण दिवस सर्व कार्य करते समय करें। नामजप अखंड हो इस हेतु सर्वप्रथम जब आप शारीरिक कार्य कर रहे हों, तब करें एवं उसके पश्चात् जब आप मानसिक कार्य जैसे समाचार पत्र पढना, दूरदर्शनपर कोई मनोरंजनके कार्यक्रम देखना, इस समय करें एवं अंतमें बौद्धिक कार्य करते हुए करें जैसे कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय लेना इत्यादि। इस प्रकार नामजपको शीघ्र अति शीघ्र अखंड करनेका ध्येय रख, उस दिशामें प्रवास करें – तनुजा ठाकुर (क्रमश:)
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