एक समाचारपत्र अनुसार कश्मीरमें ५० से अधिक निजी केबल अन्तर्जालपर (नेटवर्कपर) पाकिस्तान एवं सऊदी अरबके प्रसारवाहिनियोंका (चैनलोंका) प्रसारण किया जा रहा है जो वहांके स्थानीय युवाओंको हिंसा एवं पथराव हेतु भडकानेका कार्य करती है, जबकि सूचना प्रसारण मन्त्रालयके अनुसार इनमेंसे अनेकोंपर प्रतिबन्ध लगाया गया है तब भी कश्मीरमें ये प्रसारवाहिनियां कार्यरत हैं । ये प्रसारवाहिनियां, सुरक्षाबलोंके हाथोंसे मारे जानेवाले आतंकवादियोंको हुतात्मा (शहीद) बताते हैं एवं सेनाकी कार्यवाहीको मानवाधिकारका उल्लंघन बताकर वहांकी स्थितिको दयनीय बना रहे हैं ! इससे पूर्व ज्ञात हुआ था कि वहां ३०० व्हाट्सएप गुट पत्थर फेंकेनेवालोंको एकत्रित करनेका कार्य कर रहे थे ? क्या कश्मीर राज्यके शासनके वरद हस्तके बिना यह सम्भव है ? क्या केन्द्र शासन, वहां शीघ्र हस्तक्षेप कर यह सब बन्द करेगा ? (७.५.२०१५)
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