आध्यात्मिक प्रगति हेतु समर्पण एक अति आवश्यक गुण होता है और यह एक स्त्री सुलभ गुण है इसलिए एक पुरुष सन्त इस गुणको शीघ्र आत्मसात करने हेतु कुछ दिवस स्त्रियों समान वेश धारण कर, इस गुणको आत्मसात कर भक्ति करने लगे थे | वे आजके कुछ व्यभिचारी भांड समान नहीं थे वे, जो मात्र ओछी प्रसिद्धि पाने हेतु स्त्रीका वेश धारण कर भक्तिका ढोंग करते हैं; अतः स्त्रियों आध्यात्मिक प्रगति हेतु ईश्वर प्रदत्त इस गुणको आत्मसात करनेका प्रयास करें !
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