इस संसारके प्रत्येक व्यक्तिको कोई भी प्रसन्न नहीं कर सकता है; किन्तु संसारके रचयिता, परम पिता परमेश्वरको अपने क्रियमाण कर्मके द्वारा अर्थात साधनाद्वारा प्रसन्न किया जा सकता है । और वे प्रसन्न हो जाएं तो सर्व जगत स्वयं ही प्रसन्न हो जाता है अर्थात एक साधे सब सधे !
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